भाई हो तो ऐसा



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प्रेषक : किरण …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम किरण है, में 38 साल की एक शादीशुदा महिला हूँ और में मध्यप्रदेश के एक छोटे से शहर की रहने वाली हूँ। दोस्तों मेरे परिवार में मेरे पति उनकी उम्र 47 साल, मेरा एक बेटा जिसकी उम्र 14 साल और मेरी एक बेटी जिसकी उम्र 18 साल है। दोस्तों मेरे पति नौकरी करते है और उनको पिछले आठ साल से दमे की बीमारी है, जिसकी वजह से थोड़ा सा भी शारीरिक काम करने से उनकी साँसे उखड़ने लगती है और इस वजह से में पिछले आठ सालों से सेक्स का वो सुख नहीं ले सकी हूँ जिसकी उम्मीद हर एक पत्नी को अपने पति से होती है। दोस्तों अब तो मेरी सेक्स की इच्छाए भी मर सी गई है, लेकिन मेरा बदन अभी भी बहुत सेक्सी दिखता है और में बिल्कुल जयप्रदा की तरह सुंदर आकर्षक नजर आती हूँ। एक बार में अपने चाचा की लड़की की शादी में अपने बच्चों के साथ अपने मायके आई हुई थी। अब शादी होने की वजह से घर में बहुत से मेहमान थे और शादी के एक दिन पहले की बात है, मुझे नहाने के लिए बाथरूम खाली नहीं मिल रहा था और इसलिए में ऊपर छत वाले बाथरूम में नहाने के लिए चली गई। तभी मैंने देखा कि बाथरूम का दरवाज़ा अंदर से बंद था और मैंने आवाज देकर पूछा कि अंदर कौन है? फिर उसी समय अंदर से सूरज की आवाज आई, वो मुझसे कहने लगा कि दीदी में हूँ, बस दो मिनट में बाहर निकल रहा हूँ आप रुको।

अब मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है। दोस्तों सूरज मेरे चाचा का लड़का है, उसकी उम्र 28 साल है और वो एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। फिर कुछ देर के बाद सूरज ने दरवाज़ा खोला और बोला कि लो दीदी अब आप भी नहा लो। अब मैंने देखा कि वो उस समय टावल पहने हुए था और वो अपने कपड़े हाथ में लेकर मेरे सामने खड़ा था। फिर उसी समय उसका कदम बाथरूम के बाहर पड़ते ही, वो फिसल गया और धड़ाम से नीचे गिर गया। अब उसके गिरते ही उसका टावल ऊपर हो गया और फिर उसका बड़ा आकार का बिल्कुल नंगा लंड मेरे सामने था। तभी वो जल्दी से उठ खड़ा हुआ और शरमाते हुए नीचे भाग गया। अब में उसका लंड देखकर बिल्कुल सन्न रह गई थी और मुझे पसीना आने लगा था। दोस्तों मेरी आठ साल से चुदाई के लिए तरस रही चूत उस लंड को देखकर एक बार फिर फड़क उठी थी। फिर में गुमसुम सी बाथरूम के अंदर गई और दरवाज़ा बंद करके अपने सारे कपड़े उतारकर फुवारे के नीचे खड़ी हो गई। दोस्तों में अभी भी सूरज के लंड के विचारों में खोई हुई थी, वो ठंडा पानी मेरे ऊपर से लगातार बह रहा था। तभी अचानक से मेरा एक हाथ मेरी चूत पर चला गया और अब में अपनी उँगलियों से अपनी चूत को मसलने लगी थी।
फिर करीब दस मिनट तक अपनी चूत को मसलने के बाद मेरी गति अपने आप ही बढ़ गई थी और अब में अपने मुँह से सिसकियाँ निकालने लगी थी। फिर में कुछ देर बाद नीचे बैठ गई और मैंने फुवारे से गिरते पानी की तरफ अपनी चूत को ऊपर उठा दिया। अब वो पानी सीधा मेरी चूत पर गिर रहा था और में लगातार सूरज के बारे में ही सोचते हुए अपनी उंगली को चूत में ज़ोर-ज़ोर से अंदर बाहर कर रही थी। अब मुझे यह सब करने में बहुत मस्त मज़ा आ रहा था और अब मेरे मुँह से वो सिसकियाँ बढ़ने लगी थी और फिर आचनक से मैंने बहुत ज़ोर से चीखते हुए अपनी चूत का पानी छोड़ दिया और अब में एकदम निढाल होकर फर्श पर लेट चुकी थी। अब मेरी साँसे बहुत ज़ोर-ज़ोर से चल रही थी। दोस्तों सच में मुझे उस दिन इतने सालों के बाद उस काम को करके बहुत सुकून मिला था। फिर मैंने मन ही मन में सोचा कि सूरज के बारे में सोचकर ही जब मुझे इतना सुख मिला है, तो जब वो मेरी चुदाई करेगा तब तो मुझे कितना मस्त आंनद मिलेगा? फिर कुछ देर के बाद में उठी और नहाकर कपड़े बदलकर बाहर आ गई, मैंने नीचे आकर सबसे पहले सूरज को इधर-उधर देखा। अब वो तो मेरे साथ ऐसे व्यहवार कर रहा था जैसे कुछ हुआ ही ना हो, लेकिन अब मेरी सोच सूरज के लिए बिल्कुल बदल चुकी थी।

अब में बार-बार सूरज को छूने का प्रयास कर रही थी और उसके आस-पास ही रहने लगी थी, लेकिन वो कुछ नहीं समझ सका था। दोस्तों में उसके लंड को भूल नहीं पा रही थी और फिर ऐसे ही मज़े से वो शादी पूरी हो गई और फिर शादी के दो दिन के बाद घर के सभी बड़े लोग चाचा की लड़की को लेने पहली बार उसके ससुराल गये हुए थे। अब घर पर कुछ महिला मेहमान के अलावा में, मेरे बच्चे और सूरज ही थे। अब शादी की हलचल के बाद घर में कुछ शांति थी, उस समय शाम के आठ बजे थे और सभी लोग खाना खा चुके थे। फिर एक कमरे में सभी महिलाए सोने की तैयारी कर रही थी, मेरे बेटी और मुझे भी उसी कमरे में सोना था और वो सभी लोग बहुत थके हुए थे। अब मेरी बेटी उन महिलाओं के साथ सो गई और मेरा बेटा दूसरे कमरे में पलंग पर लेटकर टी.वी देख रहा था, वो हर रात को उधर ही सोता था और सूरज का एक अलग ही कमरा था। फिर सूरज उस समय खाना खाने के बाद बाहर घूमने गया हुआ था और में बाहर आकर अपने बेटे के साथ उसके बिस्तर पर आधी लेटकर टी.वी देखने लगी थी। फिर रात के करीब 9 बजे सूरज घर आ गया और वो मुझे देखकर मुस्कुराया और वो मुझसे पूछने लगा कि क्या देख रही हो दीदी? मैंने उसको कहा कि कहानी घर-घर की, आओ तुम भी देख लो।

फिर वो बोला कि हाँ में अभी आता हूँ दीदी और यह कहकर वो अपने कमरे में चला गया और कपड़े बदलकर वापस आकर मेरे बेटे के पास में लेटकर टी.वी देखने लगा था। अब मेरी धड़कने पहले से ज्यादा बढ़ चुकी थी और में जब भी सूरज के पास होती, तभी मेरी चूत उसके लंड के लिए फड़कने लगती। फिर उसी समय मैंने सोचा कि काश आज मुझे अपनी चुदाई का मौका मिल जाए, क्योंकि आज घर पर भी ज्यादा लोग नहीं है और मेरी चूत की आग भी ठंडी हो जाएगी और फिर में मन ही मन यह बड़बड़ाती रही। अब रात के करीब दस बज रहे थे, मेरा बेटा मुझसे कहने लगा कि मम्मी आप यह बल्ब बंद कर दो, मुझे अब नींद आ रही है, क्योंकि तुम्हारा यह सास बहु का नाटक बहुत देर तक ऐसे ही चलता रहेगा और में जानता हूँ कि आप इसको पूरा देखकर ही सोओगी। फिर उसके मुहं से यह बात सुनकर मुझे हँसी आ गई और अब सूरज भी हँसने लगा था और वो मुझसे बोला कि हाँ दीदी आप बल्ब को बंद कर दो और जब मेरी आंखे भी भारी होने लगेगी तो में भी जल्दी सोने चला जाऊँगा। फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है और उठकर मैंने उस बल्ब को बंद कर दिया और फिर उसी बिस्तर पर अपने बेटे के पास बैठकर में टी.वी देखने लगी थी। दोस्तों दीवार की तरफ सूरज लेटा हुआ था फिर मेरा बेटा और फिर में लेटी थी।

फिर कुछ देर के बाद मेरे बेटे की नींद लग गई और फिर कुछ देर के बाद सूरज की आंखे भी बंद हो गई, लेकिन मैंने तब भी जानबूझ कर सूरज को उसके कमरे में जाने के लिए नहीं उठाया। अब मैंने टी.वी की आवाज को बिल्कुल धीमी कर दिया, कुछ देर और इंतज़ार करने के बाद में दबे पैर उठी और मैंने पास वाले कमरे में जाकर देखा। दोस्तों उस समय मेरी बेटी और मेहमान सभी लोग बेसुध होकर सो रहे थे। अब मैंने वापस आकर छोटे बल्ब को जलाया और टी.वी को बंद कर दिया और में अपने बेटे के पास ही लेट गई। फिर करीब आधे घंटे तक इंतज़ार करने के बाद मैंने दोबारा स्थिति का जायजा लिया, सभी लोग गहरी नींद में सो रहे थे और फिर मैंने सूरज को देखा, तो वो भी अब नींद में था। अब सूरज को देखकर मेरी धड़कने बढ़ गई थी और में अपने हाथों से अपने बूब्स और चूत को मसलने लगी थी। फिर मैंने लेटे हुए ही अपनी साड़ी को ऊपर उठाया और उसको अपनी जांघो तक ले गई, जिसकी वजह से मेरी भरी हुई गदराई हुई गोरी जांघे अब साफ दिखने लगी थी। फिर मैंने अपनी साड़ी का पल्लू अपनी छाती से नीचे करके अपने ब्लाउज का एक बटन खोलकर अपने बूब्स को पकड़कर इस तरह बाहर खीचा कि उसकी वजह से मेरा आधा बूब्स और ब्रा दिखने लगे।

फिर मैंने धीरे से अपने बेटे का सूरज की तरफ वाला हाथ अपने हाथ से पकड़ा और थोड़ा ऊपर उठाकर सूरज के मुँह पर पटक दिया और झट से दोबारा लेट गई, जैसे में बेसुध सो रही हूँ। अब उसके मुँह पर मेरे बेटे का हाथ गिरते ही सूरज हड़बड़ाकर उठ गया और फिर उसको मेरे बेटे का हाथ दिखा, वो झट से समझ गया कि नींद में उसका हाथ टकरा गया होगा। अब वो दोबारा से सोने ही वाला था कि उसकी नजर मेरे ऊपर पड़ी और में अपनी दबी आँख से सब कुछ देख रही थी और कमरे में उस कम रोशनी की वजह से उसको मेरी थोड़ी खुली आंखे नहीं दिख रही थी। फिर में कुछ देर ऐसे ही पड़ी रही, सूरज मेरी नंगी जांघो को अपनी चकित नजरों से देखता जा रहा था और कुछ देर तक देखने के बाद सूरज अपनी जगह पर ही लेट गया और वो लगातार मुझे ही देखता रहा। अब मैंने मन ही मन में सोचा कि एक जवान मर्द होने की वजह से उसको मेरी नंगी जांघे देखना तो बड़ा अच्छा लग रहा है, लेकिन भाई होने की वजह से वो मेरे साथ कुछ भी करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। फिर मैंने सोचा कि कहीं यह मौका भी मेरे हाथ से ना चला जाए? और मैंने उसके मन में हवस को बढ़ाने के लिए एक और हमला करने की बात अपने सोची।

अब वो मुझे लगातार ही देखे जा रहा था, लेकिन कुछ कर नहीं रहा था। फिर मैंने अपना एक पैर मोड़कर थोड़ा ऊपर उठा दिया, जिसकी वजह से मेरी साड़ी अब मेरी कमर में सिमट चुकी थी और अब उसको मेरी पेंटी पूरी नजर आने लगी थी। अब यह द्रश्य देखकर सूरज एक बार फिर से उठकर बैठ गया और वो परेशान नजर आने लगा था। अब वो बार-बार मेरे बेटे की तरफ देख रहा था और लगातार मेरी नंगी जाँघो को घूरकर देखे जा रहा था। अब उसके होंठ सूख चुके थे और फिर वो बार-बार अपने होंठो पर जीभ फैर रहा था। अब मेरी भी धड़कन तेज हो गई थी, इस वजह से मेरे बड़े आकार के बूब्स लगातार ऊपर नीचे हो रहे थे। फिर सूरज धीरे से उठा और पलंग के नीचे आकर मेरे पैरों के पास जमीन पर अपने पंजो के बल बैठकर मुझे देखने लगा था। अब में समझ चुकी थी कि में सूरज की काम वासना जगाने में कामयाब हो गई हूँ, कुछ देर बाद उसने धीरे से मेरे पैरों को अपनी उँगलियों से छुआ और उसकी वजह से मुझे करंट सा लगने लगा था, लेकिन में ऐसे ही पड़ी रही। अब उसका मुँह बिल्कुल मेरे पैरों के पास था, जिसकी वजह से उसकी गर्म साँसे में अपने पैरों पर महसूस कर रही थी।

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फिर वो उठा और अब वो पलंग के इस तरफ आकर मेरी कमर के पास बैठ गया और फिर उसने धीरे से मेरी जांघो पर अपना एक हाथ रख दिया। अब मैंने उसको कुछ भी नहीं कहा जिसकी वजह से उसकी हिम्मत और भी ज्यादा बढ़ गई और फिर उसने अपना एक हाथ मेरी जांघो पर से फैरते हुए मेरी चूत पर रख दिया। अब में बहुत ही गरम हो चुकी थी, वो लगातार अपना हाथ धीरे-धीरे फैरता जा रहा था जिसकी वजह से मुझे परम सुख की प्राप्ति हो रही थी, क्योंकि में कब से इसके लिए तड़प रही थी कि सूरज मेरी चूत को सहलाए। अब उसकी नजर मेरी उभरी हुई गोरी सुडोल छाती पर पड़ी, तभी उसने हिम्मत करके धीरे से अपना एक हाथ मेरी गोलाईयों पर रख दिया, लेकिन मुझसे सहन नहीं हो रहा था। फिर उसी समय मैंने जोश में आकर उसके हाथ पर अपना एक हाथ रखकर ज़ोर से अपने बूब्स पर दबा दिया और झट से अपनी आँखों को खोल दिया। अब सूरज घबरा गया, लेकिन अगले ही पल उसको मेरी हरकत का अंदाजा हो गया था और अब वो समझ गया था कि में भी चुदना चाहती हूँ। फिर मैंने उसको अपने ऊपर खीच लिया, सूरज अब बिल्कुल मेरे ऊपर था और हम दोनों ही उस समय एक दूसरे को अपनी बाहों में जकड़े हुए थे और उसकी छाती से मेरे बूब्स दब रहे थे।

अब वो मुझे और में उसको जोश में आकर चूम रहे थे, वो अपने होंठ मेरे कान, होंठो और मेरे बूब्स से रगड़ रहा था और मुझे उसके हाथों का स्पर्श अपने बूब्स पर पाकर बड़ा मज़ा आ रहा था। फिर कुछ देर के बाद मैंने उसको कहा कि रूको यहाँ नहीं, हम आगे का काम तुम्हारे कमरे में करते है तुम वहीं चलो, वो यह बात सुनकर रुक गया। फिर हम दोनों उठे और सूरज के कमरे में चले गये तुरंत ही सूरज ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया और वो भूखे शेर की तरह मेरे ऊपर टूट पड़ा था। अब वो खड़े-खड़े ही मुझे पागलों की तरह चूमे जा रहा था और उसने मेरी साड़ी के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपने होंठ लगा दिए, जिसकी वजह से में ऊपर से नीचे तक हिल गई। फिर उसने मुझे अपनी गोद में उठाकर बिस्तर पर पटक दिया, में बड़ी ही सेक्सी अदा के साथ उसके सामने लेट गई और उसको नशीली नजरों से देखती हुई अपनी जीभ पर ऊँगली और अपने होंठो पर जीभ को फैर रही थी। अब मेरी साँसे बड़ी तेज-तेज चल रही थी, उसने नीचे झुककर मेरे पैर पर अपना एक हाथ रखना चाहा तभी में एकदम से बिस्तर पर पल्टी मार गई और बिस्तर के किनारे पर पेट के बल लेटकर में अपना एक पैर मोड़कर अपनी गांड ऊपर उठाकर उसको ललचाने लगी थी।
अब में कुछ देर पूरा मज़ा लेने के मुड में थी, उसने एक बार फिर से झुककर मेरे पैर का अंगूठा अपने होंठो में दबाया, लेकिन कुछ देर के बाद मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तब मैंने अपने पैर ऊपर खीच लिए। अब वो बिस्तर के नीचे ही खड़ा था, में बिस्तर पर कुछ और ऊपर खिसककर आधी लेट गई और फिर मैंने अपनी मादक अदा से अपने दोनों पैर फैलाए और धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर करने लगी थी। अब वो खड़ा-खड़ा यह सब देख रहा था, में अपने होंठो पर जीभ फैर रही थी और नीचे से अपनी गांड को ऊपर उठा उठाकर उसको ललचा रही थी। फिर मैंने अपनी जांघो तक साड़ी को ऊपर उठा लिया था और में अपना एक हाथ अंदर डालकर अपनी चूत को मसलने लगी थी और अपने दूसरे हाथ से अपने बूब्स को दबाने लगी थी। दोस्तों आज में बहुत ही बिंदास तरीके से उसके लंड से अपनी चूत की चुदाई करवाना चाहती थी, क्योंकि मेरी चूत लंड के लिए पिछले आठ सालों से तड़प रही थी और में उस खेल का आज पूरा सुख लेना चाहती थी। फिर वो बिस्तर पर चढ़ गया और अपने घुटनों के बल किसी जानवर की तरह चलते हुए मेरे पैरों को चाटने लगा और फिर मेरे पैरों से होते हुए मेरी जांघो को चाटते हुए उसने मेरी चूत को अपने मुँह में भर लिया।

तभी में चीख पड़ी और फिर में बिस्तर पर पलट गई, जिसकी वजह से अब मेरी गांड उसके सामने थी। फिर उसने नीचे से चूमना शुरू किया और मेरी गदराई हुई जांघो को उसने बहुत सहलाया, बड़ा चाटा और मेरी साड़ी को भी ऊपर कर दिया था। अब मेरी गांड को देखकर तो वो मस्त हो गया, उसने मेरी मस्त गोरी बड़ी गांड की पूरी गोलाईयों पर अपनी जीभ फैरी और बहुत सहलाया, जिसकी वजह से अब मेरे मुँह से सिसकियों की आवाजें निकलने लगी थी। अब में अभी भी पेट के बल बिस्तर पर लेटी हुई थी। अब वो मेरे ऊपर था और उसने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और मेरी पेंटी को भी निकाल दिया जो अब गीली हो चुकी थी। फिर वो नंगा ही मेरे ऊपर आ गया था, उसने उसका लंड मेरी मस्त गांड से बड़ा रगड़ा और अपने होंठो में मेरे कान को चबाता रहा, जिसकी वजह से में पागलों की तरह चिल्लाने और चीखने लगी थी। दोस्तों यह चीख अब मुझे आ रहे उस मज़े की वजह से मेरे मुँह से निकल रही थी। फिर में सीधी लेट गई और बैठकर उसका लंड देखकर लपककर अपने एक हाथ में ले लिया, उसका सात इंच का लंड देखकर मेरी आँखों में चमक आ गई। अब मैंने उसको एक धक्का दिया, जिसकी वजह से वो बिस्तर पर सीधा गिर गया, में उसका लंड अभी भी अपने हाथ में पकड़े हुए थी।

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फिर में उसके लंड के ऊपर झुक गई और मैंने तुरंत ही उसका पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया, करीब दस मिनट तक उसके लंड को चूसने के बाद में उसके ऊपर लेट गई और उसको पागलों की तरह चूमने लगी। अब उसने मुझे अपनी बाहों में भरकर पल्टी मारी और अब वो मेरे ऊपर आ गया, उसके बाद मुझे चूमते हुए उसने मेरे कपड़े निकालना शुरू किया। अब में कुछ ही देर में उसके सामने बिल्कुल नंगी लेटी हुई थी, उसने नीचे से ऊपर तक मुझे चूमा और मैंने भी पूरे जोश के साथ उसका साथ दिया। दोस्तों हम दोनों उस समय इतने उत्तेजित हो चुके थे कि पूरे बिस्तर पर एक दूसरे से नाग-नागिन की तरह लिपट रहे थे और यहाँ वहाँ पल्टी मार रहे थे, कभी में उसके ऊपर, तो कभी वो मेरे ऊपर आ जाता। अब हम दोनों भूखे शेर की तरह एक दूसरे को खा जाने के लिए बेताब थे, उसी समय मैंने उसको कहा कि बस तुम मुझे और मत तरसाओ, प्लीज अब डाल भी दो इसको अंदर और यह कहते हुए मैंने बड़ी ही बेरहमी से उसका लंड पकड़कर अपनी चूत में बहुत ज़ोर से रगड़ दिया। फिर वो उस दर्द की वजह से कराह उठा, उसके लंड के साथ-साथ उसके आंड भी उस समय मेरी मुठ्ठी में आ चुके थे। फिर उसने मेरे हाथ से अपना लंड छुड़ाया और मेरे दोनों पैर अपने दोनों हाथों से पकड़कर मेरे सर की तरफ मोड़ दिए, जिसकी वजह से नीचे से मेरी गांड ऊपर उठ चुकी थी।

अब वो घुटनों के बल बैठा हुआ था और उसने अपनी जांघो पर मेरी गांड को रखकर अपने लंड की सीध में मेरी चूत को लाकर मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और एक ही जोरदार झटके में पूरा अंदर कर दिया। अब में उस तेज प्रहार की वजह से चीख पड़ी, उस समय मेरी आंखे बंद थी और मैंने अपने दोनों हाथों से उसके बाजु पकड़े हुए थे। दोस्तों उस दर्द कि वजह से अब उसका लंड अंदर जाते ही मेरे नाख़ून उसकी बाहों पर गड़ गये थे और उसकी बाहों से खून निकलने लगा था, लेकिन उसने उसकी बिल्कुल भी परवाह नहीं कि और उसने अपनी गति को पहले से ज्यादा बढ़ा दिया था। फिर करीब दस मिनट तक एक ही गति में वो मुझे चोदता रहा, मुझे कुछ परेशानी होने लगी थी और इसलिए मैंने उसको कुछ देर रुकने के लिए कहा। अब वो रुक गया और मैंने अपने दोनों पैर उसके हाथों से छुड़ाकर सीधे कर लिए, पैर सीधे होते ही मुझे कुछ राहत मिली। फिर कुछ देर रुककर मैंने थोड़ा ऊपर उठकर उसकी गर्दन को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और एक ही झटके से उठकर उसकी गोद में बैठ गई। दोस्तों उसका लंड अभी भी मेरी चूत में था, मैंने उसको पीछे की तरफ धक्का दिया जिसकी वजह से वो लेट गया। अब में उसके ऊपर थी और में उसको चोद रही थी और बहुत ज़ोर-ज़ोर से अपनी कमर को आगे पीछे कर रही थी कि तभी आचनक से मैंने अपनी गति को बढ़ा दिया।

अब मेरे मुँह से चीख निकल रही थी और अब में ज़ोर-ज़ोर से अपनी कमर को हिलाते हुए पागलों की तरह चिल्लाने लगी थी और अपनी कमर को ज़ोर-ज़ोर से हिलाती रही, हिलाती रही और हिलाती ही रही और फिर एक ज़ोरदार झटके के साथ में चिल्ला पड़ी और फिर एकदम से रुक गई। फिर कुछ देर के बाद में एकदम निढाल होकर उसके ऊपर धड़ाम से गिर गई और अब मेरी साँसे बहुत तेज गति से चल रही थी। अब उसके लंड की हालत तो खराब हो चुकी थी, उसने प्यार से मेरे सर पर अपना हाथ फैरा और मुझे चूमा, में उस समय बिल्कुल लाश की तरह उसके ऊपर करीब पांच मिनट तक वैसे ही पड़ी रही। फिर थोड़ी देर के बाद में सामान्य हुई तब अपने हाथों के सहारे थोड़ा ऊपर उठी, में बहुत खुश थी और मुस्कुरा रही थी। अब मैंने उसको प्यार से चूमा, लेकिन उसकी आग अभी शांत होना बाकी थी और मैंने देखा कि उसका लंड खंबे की तरह मेरी चूत के अंदर अभी भी आग को उगल रहा था। तभी में एकदम से खड़ी हो गई, मेरी चूत का बहुत सारा पानी उसके लंड के चारों तरफ फैल गया था। अब वो मेरे दोनों पैरों के बीच में पड़ा था, में बिस्तर से नीचे आ गई और बाथरूम में चली गई और वो वैसे ही पलंग पर पड़ा रहा।

फिर बाथरूम से वापस बाहर आकर मैंने अपनी साड़ी के पल्लू से उसका लंड और आसपास की जगह को साफ किया, उस समय हम दोनों ही पसीने में तर हो चुके थे। फिर वो भी उठकर बैठ गया और अब हम दोनों ही कूलर के बिल्कुल पास जाकर खड़े हो गये, मैंने उसकी छाती पर अपना एक हाथ रखा और फिर उसकी छाती को चूमते हुए अपना सर रखकर चिपककर खड़ी हो गई। अब उसने भी मुझे प्यार किया और अपनी बाहों में भरकर खड़ा रहा, कुछ देर के बाद हमारी गरमी कुछ कम हुई और तब हम लोग दोबारा से बिस्तर पर आ गये। अब तक में एक बार फिर से चुदने के लिए तैयार हो चुकी थी, उसने इस बार मुझे कुतिया की तरह होने को कहा और मैंने खुश होकर तुरंत ही अपनी गांड को उसकी तरफ कर दिया। अब उसने मेरी गांड में अपना लंड डालना चाहा, लेकिन मैंने उसको ऐसा करने से साफ मना कर दिया। फिर मैंने नीचे से अपना एक हाथ डालकर उसका लंड पकड़ा और अपनी चूत में डाल लिया, तब उसने मुझे चोदना शुरू किया और फिर अपने धक्कों की गति को बढ़ा दिया और गति को इतना बढ़ाया कि उसको वजह से पलंग आवाज करने लगा था। अब में दर्द उन तेज धक्कों की वजह से चिल्लाने लगी थी, लेकिन अब वो कहाँ मेरी बात को मानने वाला था? वो बहुत देर से अपने पर काबू करके बैठा था।

फिर करीब बीस मिनट तक एक ही गति से वो मुझे चोदता रहा और मेरी बड़ी गांड जो अब भी उसके सामने थी, जिसको देखकर उसको अब और भी जोश आ रहा था। अब में उसको बोली कि प्लीज अब तुम छोड़ दो, प्लीज क्या आज तुम मेरी जान ही निकाल दोगे? वो कहने लगा कि हाँ ठीक है और अपनी तेज गति से धक्के मार मारकर उसने मेरी चूत में अपना वीर्य छोड़ दिया था। अब मेरा मन तो कर रहा था कि सूरज रातभर मुझे ऐसे ही चोदता रहे, लेकिन मुझे दर्द की वजह से बड़ी परेशानी हो रही थी। अब मेरी चूत बड़े दिनों की उस चुदाई की वजह से सूज चुकी थी, वो मेरे ऊपर ही ढेर हो गया। फिर कुछ देर के बाद हम दोनों उठे और बाथरूम से वापस आकर हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने और अब में बड़ी खुश थी। फिर मैंने उसको कहा कि आज पहली बार मुझे इतना मज़ा आया है, में तुम्हें कभी नहीं भूल पाऊँगी और फिर मैंने उसका माथा चूमा, लेकिन अब सूरज कुछ गुमसुम सा था। अब मैंने उसको पूछा कि क्या हुआ? तब वो बोला कि मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है दीदी, आप और में बहन-भाई है और हमारे बीच यह सब।

फिर मैंने उसको कहा कि तो क्या हुआ सूरज? हम भाई-बहन होने के पहले एक औरत और मर्द भी है और यह सेक्स सभी की एक बहुत बड़ी जरूरत होती है और जहाँ तक मेरी बात है, सूरज मेरे भाई तुझे तो तेरे जीजाजी की बीमारी के बारे में तो पता ही है, वो मुझे सेक्स का पूरा सुख नहीं दे सकते है, वो कुछ देर करते है और ढेर हो जाते है जिसकी वजह से मेरी यह आग ज्यादा ही भड़क उठती है। अब तुम ही बताओ कि में इस आग को कहाँ जाकर बुझाऊँ? में पिछले आठ सालों से सेक्स के लिए तड़प रही थी और अब यदि में अपनी इस सेक्स की आग को बुझाने के लिए कहीं बाहर किसी पराए मर्द का सहारा लूँ, तो उसकी वजह से बदनामी का डर और बीमारी का भी डर रहेगा और फिर इससे तो अच्छा है कि में अपने इस भाई से ही अपनी इस सेक्स की प्यास को बुझा लूँ। अब मुझे कोई बदनामी का भी डर नहीं रहेगा और घर की बात घर में ही रहेगी और अब तू ही मुझे बता कि तुझे यह क्या अच्छा लगेगा कि में बाहर किसी पराए मर्द के साथ सेक्स करूँ बोलो? फिर वो कुछ देर तक तो खामोश ही रहा और फिर मुस्कुराकर वो मुझसे लिपट गया। दोस्तों यह थी मेरी सच्ची चुदाई की घटना अपने ही भाई के साथ जिसका हम दोनों ने पूरा पूरा साथ देकर बड़ा मज़ा उठाया ।।

धन्यवाद …

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