चुदक्कड़ लड़कियों की चुदाई



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प्रेषक : रौनक …

हैल्लो दोस्तों, आज में आप सभी कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों को पढ़ने वालों के सामने अपनी एक सच्ची घटना को सुनाने यहाँ आया हूँ। दोस्तों यह पिछले महीने की बात है, तब मेरे मौहल्ले में एक बहुत ही अमीर परिवार रहने के लिए आया। फिर में कुछ दिनों बाद ही पहली नजर देखकर ही उनकी बेटी जिसका नाम स्नेहा था उसको बहुत पसंद करने लगा था और शायद वो भी मुझे पसंद करने लगी थी। दोस्तों वो ऊफ क्या मस्त सुंदर लड़की थी? उसके बूब्स का आकार करीब 34-26-36 था और उसके गोरे कामुक बदन को देखकर किसी के भी मुँह में पानी आ जाए, में तो उसके इस बूब्स का बिल्कुल दीवाना बन गया। फिर हम दोनों में पहले आपस में कुछ दिनों तक थोड़ी जानपहचान हुई और फिर धीरे-धीरे यह जानपहचान बढ़ती गयी। अब हम दोनों में आपस में थोड़ा बहुत हँसी मज़ाक चलने लगा था और फिर आपस का वो हँसी मज़ाक अब हमारे बीच प्यार में बदल चुका था, लेकिन पांच-दस मिनट की रोज की मुलाकात के अलावा हम आपस में ज़्यादा नहीं मिल सके थे, क्योंकि हमें मौका ही नहीं मिला था। अब हम दोनों के बीच आग लगी हुई थी और इसलिए हम मुलाकात का मौका ढूँढने लगे थे। दोस्तों स्नेहा की चचेरी बहन जिसको हम लोग शीतल के नाम से पुकारते, वो हम दोनों की राजदार थी, शीतल भी स्नेहा की हम उम्र और बहुत ही सुंदर होने के साथ उसका व्यहवार बहुत अच्छा था।

दोस्तों स्नेहा और शीतल आपस में कोई भी बात नहीं छुपाती थी और इसी वजह से शीतल को मेरा राज (स्नेहा से प्यार का) पता चल चुका था। फिर एक दिन में कॉलेज से अपने घर आया, तब कुछ देर बाद ही स्नेहा मेरे घर आ गई और मुझे देखते ही उसने मेरी माँ से बात करना छोड़कर मुझसे कहा कि रौनक मुझे आपसे कुछ काम है, क्या आप मेरा काम कर देंगे? अब वो मुझसे इस प्रकार इसलिए पेश आ रही थी ताकि मेरी माँ को हमारे प्यार का राज पता ना पड़े। फिर मैंने भी हमारे प्यार को राज रखते हुए भोला बनकर कहा कि अगर करने लायक हुआ तो में जरूर कर दूँगा। अब स्नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा कि मेरा कंप्यूटर खराब हो गया है, क्या आप उसको ठीक कर देंगे? तब मैंने कहा कि क्यों नहीं? अगर ज़्यादा खराब समस्या नहीं हुई तो में जरूर कर दूँगा। फिर उसने मेरी बात को सुनकर मुस्कुराकर कहा कि हाँ ठीक है, प्लीज आप आठ बजे के करीब मेरे घर आज जरुर आ जाना और इतना कहकर वो कुछ देर बैठकर चली गई। अब में ठीक आठ बजे उसके घर पहुँच गया, तब मैंने देखा कि उसकि मम्मी-पापा और उसकी छोटी बहन-भाई कहीं बाहर शादी में जा रहे थे। फिर स्नेहा के पापा ने मुझे देखते ही मुझसे कहा कि बेटा स्नेहा का कंप्यूटर ठीक कर देना, वो और उसकी चचेरी बहन अंदर कमरे में तुम्हारा इंतज़ार कर रहे है और हमारे आने तक तुम उनके पास ही रहना।

अब मैंने कहा कि हाँ ठीक है अंकल और इसके साथ ही वो लोग घर से शादी में शामिल होने के लिए निकल गये। फिर में अंदर गया और मैंने स्नेहा को आवाज़ दी, तब वो मेरी आवाज़ को सुनते ही बाहर आ गयी और मुझे देखकर मुस्कुराई और भागकर मेरे गले लग गयी। फिर मैंने उसको कहा कि तुम यह क्या कर रही हो? अभी मम्मी-पापा वापस आ सकते है उनको थोड़ा दूर तो जाने दो। तब स्नेहा ने कहा कि मुझे तुम्हें देखकर पता नहीं क्या हो जाता है? में पागल होकर अपने होश पूरी तरह से खो बैठती हूँ। अब उसके भारी-भारी बूब्स मेरी छाती से दबे हुए थे और मुझे उसके बड़े बूब्स के स्पर्श से बहुत मस्त मज़ा आ रहा था। फिर मुझसे लिपटी हुई स्नेहा मुझे अपने कंप्यूटर वाले कमरे में ले गई और फिर मैंने जो देखा उसको देखकर में बड़ा अजीब सा महसूस कर रहा था, क्योंकि वहाँ पर उसकी चचेरी बहन शीतल पहले से ही मौजूद थी। दोस्तों में शीतल को पहले भी कई बार देख चुका था, लेकिन आज उसको देखकर मेरे पूरे बदन में एक भयंकर आग सी लगी थी। अब वो मुझे इतनी सुंदर नजर आ रही थी कि स्नेहा के साथ-साथ मेरा मन चाह रहा था कि में उसी समय उसको भी अपनी बाहों में भर लूँ, उसके बड़े ही सुंदर बूब्स और वो आकर्षक जिस्म देखकर मेरी नियत उसके ऊपर फिसल रही थी।

अब उसका वो 36-28-38 इंच आकार का बदन मुझे अपनी तरफ आकर्षित किए जा रहा था और ऊपर से उसने बड़े गले की टाईट टीशर्ट पहनी हुई थी। अब में लगातार उसके बूब्स को देख रहा था, स्नेहा और शीतल ने मेरी नजरों की सनसनाहट और बढ़ती भूख को बहुत अच्छी तरह से महसूस कर लिया था। फिर मैंने तुरंत अपनी नजरों को नीचे झुका लिया था, उसके बाद मैंने स्नेहा से पूछा कि कहाँ है कंप्यूटर? तब स्नेहा ने तुरंत ही पलटकर जवाब दिया कि शीतल के बूब्स से नजरें हटाओं तो इधर पड़ा कंप्यूटर भी शायद तुम्हे नजर आ जाता। अब उसका वो जवाब सुनकर मेरे होश उड़ गये और मेरे चेहरे पर उस बोखलाहट चिंता को देखकर उन दोनों ने हँसना शुरू कर दिया। फिर वो दोनों मुझे कंप्यूटर पर बैठाकर बाहर दूसरे कमरे में चली गयी और मैंने कंप्यूटर की खराबी को देखना शुरू किया। अब कंप्यूटर आराम से बूट हो गया और सब कुछ करने के बाद मुझे पता चला कि वो बिल्कुल ठीक था। अब में अच्छी तरह से समझ गया था कि स्नेहा ने बहाना बनाकर मुझे अपने घर में बुलाया है, उसकी इस समझदारी का लोहा में मान गया था, लेकिन मेरे दिमाग में एक सवाल लगातार अब भी चल रहा था कि उसने शीतल को आख़िर यहाँ क्यों बुलाकर बैठा रखा है? मिलना हम दोनों को था तो शीतल आख़िर यहाँ क्या कर रही है? अब में जितना सोचता उतना ही मेरा दिमाग परेशान हो रहा था।

फिर आख़िर में इसका जवाब मुझे मिल ही गया और जवाब मिला दस मिनट के बाद जब वो दोनों वापस कमरे में आई। फिर जब वो दोनों वापस आई तब ऊफ में मर जाऊं मैंने देखा कि अब वो दोनों छोटे आकार की नाइटी पहनकर वापस आई थी, आह वाह क्या मस्त जलवा था उन दोनों की उस उफनती जवानी का? उन दोनों ने नाइटी के नीचे कोई ब्रा नहीं पहन रखी थी और बिना ब्रा के पारदर्शी नाइटी से उनके बूब्स का वो गोलमटोल आकार मुझे परेशान किए जा रहा था और उनके वो बूब्स बाहर आने को तड़प रहे थे। अब यह सब देखकर में तो पत्थर की मूर्ति की तरह खड़ा-खड़ा उनको देखता ही रहा, मेरे पूरे बदन में खून ज़ोर से दौड़ने लगा था। अब मेरा लंड लोहे की तरह तनकर खड़ा हो गया था और मेरा लंड मेरी अंडरवियर को फाड़कर मेरी पेंट की चैन से बाहर आने को उतावला हो रहा था। फिर मेरे पास अपने बढ़ते हुए उभार को छुपाने की कोई जगह नहीं बची थी, लेकिन फिर भी मैंने भोले बनते हुए उस समय स्नेहा को पूछा कि कंप्यूटर तो बिल्कुल ठीक है। अब स्नेहा मेरे पास आते हुए अपनी गरम सांसो को मेरे चेहरे पर छोड़ती हुई धीमी आवाज में बोली कि कंप्यूटर तो ठीक ही था, लेकिन हम दोनों का सेटअप बिगड़ा हुआ है, प्लीज आज तुम जल्दी से अब हम दोनों को ठीक कर दो प्लीज।

अब स्नेहा जहाँ मेरे पास आकर मुझसे यह कह रही थी और वहीं शीतल ने मेरे बालों पर अपना हाथ फैरते हुए मेरे गालों को सहलाना शुरू कर दिया था। अब शीतल की उंगलियाँ मेरे चेहरे पर धीरे-धीरे रेंगने लगी थी। अब शीतल अपनी पतली उँगलियों से मेरे कान, मेरी गर्दन को सहला रही थी, तो वहीं स्नेहा मेरे चेहरे से चिपकते हुए अपनी जीभ से चाटने लगी थी। अब वो दोनों जालिम चढ़ती जवानियाँ मेरे चेहरे से खिलवाड़ कर रही थी। अब में उन दोनों की गरम सांसो को एकदम नजदीक से महसूस कर रहा था और उन दोनों की साँसे धीरे धीरे भारी होती चली गई। फिर उनकी इन हरकतों से में अपने काबू में नहीं रहा और अपना एक हाथ शीतल की नाइटी के अंदर डालकर में उसके बूब्स को टटोलने लगा था, ऊफ्फ्फ क्या बूब्स थे उसके? उसके बड़े आकार के बूब्स कई बार कपड़े के बाहर से अच्छे लगते है, लेकिन बिना कपड़ों के इतने सुंदर नहीं लगते, लेकिन शीतल के बूब्स कपड़ों के बाहर जितने सुंदर थे उससे कई गुना ज़्यादा सुंदर इस समय नाइटी से झलकते हुए लग रहे थे। अब मेरा दिल तो उन्हें बिना कपड़ों के देखने के लिए बैचेन हो रहा था, स्नेहा ने अपने होंठो से मेरे होंठो को चूमना शुरू कर दिया।

अब उसके मदमस्त भीगे हुए होंठ मेरे होंठो को ज़ोर-ज़ोर से दबा रहे थे। अब स्नेहा अपनी जीभ को मेरे मुँह के अंदर डालकर मेरी जीभ के साथ खेलने लगी थी, मेरे हाथ शीतल के बूब्स और उसके निप्पल को दबा और मसल रहे थे। तभी स्नेहा ने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए और मेरी शर्ट को उतारकर मेरी छाती के बालों को चाटने और खीचने लगी थी, मुझसे लिपटकर मछली की तरह मचलने लगी थी। फिर इतने में शीतल ने मेरी पेंट को भी उतार दिया, में सिर्फ़ अंडरवियर में था। अब स्नेहा मेरी छाती, मेरे गाल और मेरे होंठो से खेल रही थी और वहीं शीतल मेरी अंडरवियर के ऊपर से ही मेरे लंड को चाटने लगी थी। अब मेरा लंड कुतुबमीनार की तरह मेरी अंडरवियर के अंदर खड़ा था और शीतल अपनी जीभ से मेरे टोपे को चाट रही थी, तो कभी उनको अपने मुँह में गप से दबा लेती। फिर में अपने होश में था और मेरा दिल कर रहा था कि अपना अंडरवियर भी निकाल फेंकू और शीतल के मुँह में अपना लंड डाल दूँ, लेकिन वो दोनों स्नेहा और शीतल आग भड़काने के लिए इतना कुछ कर रही थी कि मैंने सिर्फ़ अब इसका आनंद उठना ही मुनासिब समझा। अब में अपनी तरफ से कोई भी हरकत नहीं कर रहा था और में सिर्फ़ उनकी उफनती हुई जवानी को देख रहा था और उनकी मेरे बदन के साथ खिलवाड़ को देखकर खुश हो रहा था और अब इतने में मेरे होश अपनी जगह पर नहीं थे।

अब स्नेहा अपने कपड़े उतारने लगी थी और फिर उसके बिना देर किए अपनी नाइटी को उतारकर फेंक दिया, मैंने देखा कि उसके बूब्स बड़े आकार के, लेकिन सख़्त थे, निप्पल एकदम ऊपर की तरफ तने हुए, लेकिन जब मेरी नजर उसके बूब्स से उसकी कमर पर से होते हुए नीचे की तरफ गयी तब में कांप उठा। दोस्तों में तो स्नेहा की चूत को देखकर एकदम पागल हो गया, देखकर लगता था कि उसने अपनी चूत को बड़ा ही संभालकर बड़े जतन से रखकर साफ़ करके सजा रखा था। दोस्तों उसको गोरी मखमल सी मुलायम चूत पर एक भी बाल नहीं था और इतनी देर की उन हरकतों की वजह से हल्का सा रस उसकी चूत से बाहर निकल रहा था। फिर उसकी चूत को देखकर मुझसे रहा नहीं गया, में जमीन पर लेटकर स्नेहा की चूत को अपनी नाक की गरम सांसो से और गरम करने लगा था, उसकी चूत की गुलाबी रंगत मेरी गरम सांसो से और भी गुलाबी हो गयी थी। अब मेरी चाहत बढ़ने लगी थी और फिर मैंने अपनी जीभ को बाहर निकालकर उसकी चूत के मुँह को छोड़कर बाकी सभी जगह को में चाटने लगा था, क्योंकि अब मेरा इरादा स्नेहा को ज़्यादा से ज़्यादा भड़काने का था।

फिर में सीधा उसकी चूत को जानबूझ कर नहीं छु रहा था, स्नेहा के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी थी और वहीं शीतल भी लेटकर मेरे लंड को मेरी अंडरवियर के ऊपर से ही ज़ोर-ज़ोर से चाट रही थी, शायद उसका इरादा भी मेरी तरह ही था। अब स्नेहा मेरी इस तरह की हरकत से एकदम बैचेन हो उठी थी, उसकी बैचेनी ने उसको पूरा हिलाकर रख दिया था और मेरे बालों को पकड़ते हुए वो बोली कि प्लीज चाटो ना मेरी चूत को, क्यों तुम मुझे इतना तड़पा रहे हो? अपनी जीभ को मेरी चूत में डालो। अब में उसकी तड़प को देखकर समझकर उसके जिस्म की आग को और भी भड़काने का काम करने लगा था, लेकिन मैंने फिर भी उसकी चूत को नहीं छुआ था। अब में अपनी जीभ से उसकी जांघो को चाट रहा था और उसकी चूत के ऊपर झाटो को साफ की हुई जगह को चाट रहा था, वहाँ चमड़ी एकदम कोमल थी। उसने अपनी झांटे थोड़ी देर पहले ही साफ की थी, देखकर ऐसा लग रहा था कि उन दोनों ने अपने घरवालों के बाहर जाने का प्रोग्राम पता चलते ही अपनी तैयारी शुरू कर दी थी और तभी तो पहले मेरे घर आकर मुझे शाम को बुलाना और फिर शाम को अपनी झाटे साफ करना, यह सब उन दोनों का एक सोचा समझा काम था।

फिर शीतल ने आगे बढ़कर मेरा अंडरवियर को उतारना चाहा, लेकिन स्नेहा जो मेरी हरकतों से पागल हुई थी उसने कहा कि एक मिनट रूको और फिर वो बाहर गयी और अपने साथ एक कैंची लेकर आ गई। अब उसने मेरी अंडरवियर को कैंची की मदद से काट काटकर उसके चिथड़े कर दिए जिसकी वजह से अब मेरा लंड अंडरवियर की क़ैद से निकलकर बाहर आकर फड़फड़ाने लगा था। अब स्नेहा ने तुरंत मेरा लंड अपनी मुठ्ठी में थाम लिया था और मेरा लंड देखकर उन दोनों के चेहरे की चमक पहले से ज्यादा बढ़ चुकी थी, उनके दिमाग में मेरे लंड के बारे में जो विचार थे उससे भी बढ़कर उनको मेरा लंड मिला था, ऐसा में उनके चेहरे की चमक को देखकर बोल रहा हूँ। दोस्तों मैंने स्नेहा की चूत को अभी तक अपनी जीभ से छुआ भी नहीं था, लेकिन स्नेहा ने मेरा लंड सीधे अपने मुँह में डाल लिया था। अब मेरे मुँह से उस वजह से आह की आवाज निकल गई, उसके मुहं की गरमी और उसके थूक से भीगी जीभ मेरे लंड को चूसते हुए कयामत ढा रही थी। अब स्नेहा ने अपनी जीभ से मेरे लंड को चूस चूसकर ऐसा उतावला कर दिया कि मुझे लगा कि मेरा वीर्य पिचकारी मारकर अभी उछलकर बाहर निकलने वाला है। फिर मैंने जबरन अपने लंड को उसके मुँह से बाहर निकाला और कहा कि मेरी जानेमन, जरा सब्र करो नहीं तो सारा मज़ा किरकारा हो जाएगा।

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अब स्नेहा अच्छी तरह से समझ चुकी थी कि मेरा लंड झड़ने वाला है और फिर उसने मेरे लंड को अपने एक हाथ से पकड़कर उसको साफ करके कहा कि अरे अभी क्यों पानी निकाल रहा है? ज़ालिम अभी तो शो शुरू ही हुआ है, यह बात सुनकर हम सभी ज़ोर से हंस पड़े। अब शीतल अपने बूब्स को मेरी छाती से लगाकर रगड़ने लगी थी, उसके अंगूर जैसे निप्पल मेरी छाती पर हल्के-हल्के चुभ रहे थे। अब वो अपने बूब्स रगड़ते हुए अपने मुँह से सिसकियों की आवाज निकाल रही थी, मेरे लंड को आराम देने के लिए स्नेहा ने अपना मुँह शीतल की जांघो में डाल दिया और अपनी जीभ को निकालकर उसकी जांघो और चूत पर लगानी शुरू कर दी, शीतल इस हरकत से तड़प उठी। अब उसने मुझे नीचे धक्का देकर मेरी छाती पर लेटकर अपने बूब्स का वजन मेरे गालों पर डालकर अपनी दोनों जांघो को फैला दिया था, जिसकी वजह से शीतल को और जगह मिल गयी, वो उसकी चूत को आराम से चाट रही थी। अब शीतल के बूब्स मेरी आँखों के सामने किसी फलदार पेड़ के एकदम ताज़े फलों की तरह लहरा रहे थे और अब जरूरत थी किसी माली की, जो इनको संभालकर इनका रस पी सके और फिर में वो माली बनकर उनको बारी-बारी से चूसने लगा।
अब शीतल अपनी चूत और बूब्स की चुसाई से उत्तेजित होकर ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी थी, उफ़फ्फ मार डाला तुमने आह्ह्ह चूसो मेरी चूत को उफफ्फ तुम भी मेरे बूब्स को चाटो वाह क्या मस्त मज़ा आ रहा है? मेरे निप्पल को अपने मुँह में लेकर अपने दांतो से चुभाओ उफफ्फ में क्या करूँ? बड़ा मज़ा आ रहा है। अब शीतल की बातें मुझे दीवाना बना रही थी, में उसके बूब्स और उसके निप्पल को हल्के-हल्के अपने दातों से काट रहा था और ज़ोर भी नहीं लगा रहा था। फिर स्नेहा भी अपनी जीभ से शीतल की चूत के दाने को रगड़ रही थी। अब शीतल इतने जोरदार मज़े की वज़ह से अपने बदन को बार-बार झटका दे रही थी, में उसके एक बूब्स को अपने एक हाथ से मसलने लगा और दूसरे बूब्स को अपने होंठो के बीच में दबाकर ज़ोर-ज़ोर से चूस रहा था। तभी मुझे लगने लगा कि अब शीतल ज़्यादा देर टिकने वाली नहीं है, अब उसकी चूत का पानी निकलने वाला ही है, क्योंकि जिस तरीके से वो चिल्ला रही थी उससे मुझे ऐसा लगने लगा था कि उसकी चूत अब अपना फव्वारा छोड़ने वाली है। अब उसके मुहं से आह्ह्ह ऊफफफ्फ में मर गयी में मर जाऊंगी हाँ ज़ोर से चूसो हाँ ऐसे ही चूसो जोर से चूसो, हरामजदी चूस, मेरी झड़ने वाली है और उसके साथ ही उसकी चूत पानी छोड़ने लगी थी।

दार काम था, उसको झड़ने में उसके पहले कभी इतना मज़ा नहीं आया होगा, वो ज़ोर-ज़ोर से साँसे ले रही थी, उसका पूरा बदन काँप रहा था। फिर मैंने उसके बूब्स को अपने मुँह से बाहर निकाल दिया और अपनी बाहों को उसकी कमर पर लपेटे हुए उसके होंठो को अपने होंठो से लगा लिया और में उसके होंठो को चूसते हुए उसको मज़ा आराम देने लगा था। अब उधर स्नेहा ने तुरंत ही शीतल की चूत को छोड़कर मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया था, जिसकी वजह से मेरा लंड उसके मुँह में उछलकूद मचाने लगा था। फिर उसने शीतल को उठने का इशारा किया और जैसे ही शीतल मेरे ऊपर से उठी, वैसे ही स्नेहा अपनी जांघो को चौड़ा करके अपनी चूत को मेरे लंड से रगड़ने लगी। अब वो मेरे लंड के ऊपर अपनी चूत की सवारी करने की तैयारी कर रही थी। अब उसकी प्यासी चूत का मुँह मेरे लंड के टोपे को अपने अंदर समाने के लिए बड़ा बैचेन था और तभी स्नेहा ने झटके से अपनी चूत के अंदर मेरे लंड को अपने में समा लिया। अब मेरा आधा लंड उसकी चूत में चला गया था, उसने वापस थोड़ा ऊपर उठते हुए दूसरा तेज झटका लगा दिया तब देखते ही देखते उसकी चूत मेरे पूरे लंड को खा गयी।

अब मेरे लंड के अंदर जाते ही स्नेहा के मुँह से प्यार भरी चीख निकल पड़ी थी, उसको इतने बड़े लंड के अंदर जाने का शायद थोड़ा दर्द हुआ होगा, लेकिन आठ-दस धक्कों के बाद उसको अपनी चूत को चुदवाने में मज़ा आने लगा था। अब वो बड़े आराम से अपनी चूत को चुदवा रही थी, या यह कहूँ कि मेरे लंड को अपनी चूत से चोद रही थी। दोस्तों शीतल इतनी देर में वापस से गरम हो चुकी थी, लेकिन उसकी चूत को शायद पांच-दस मिनट के आराम की जरूरत थी और इसलिए उसने एक तरफ बैठकर स्नेहा और मेरी चुदाई को देखना बेहतर समझा। अब स्नेहा अपने कूल्हों को उछालना बंद करके अपनी चूत के दाने को मेरी झाटो से रगड़ते हुए चुदवा रही थी, चूत के दाने की रगड़ाई में उसको ज़्यादा मज़ा आ रहा था। तभी शीतल उठी और अपनी चूत मेरे मुँह पर रखकर चुसवाने लगी और साथ ही वो स्नेहा के बूब्स से अपने बूब्स रगड़ने लगी थी और अपने होंठो को उसके होंठो से चूसने भी लगी थी। दोस्तों अब हालत इस प्रकार थी कि में नीचे लेटा हुआ शीतल की चूत को चूस रहा था और मेरे लंड पर बैठी स्नेहा अपनी चूत को चुदवा रही थी, जबकि शीतल अपने बूब्स स्नेहा के बूब्स से और अपने होंठो से उसके होंठो पर चुम्मा कर रही थी। फिर स्नेहा की चूत रस से एकदम भीग चुकी थी, उसने अपने होंठो को शीतल के मुँह से आज़ाद किया।

अब उसको जो मज़ा आ रहा था, वो उसकी जीभ से बाहर निकलने लगा था हाँ रगड़ मेरे बूब्स साली, बहुत दिनों के बाद मुझे चुदाई का मज़ा मिला है, चोदो मेरे राजा अपने लंड का झटका नीचे से मेरी चूत में दो, आज में अपनी चूत को बहुत चुदवाऊंगी, शीतल तुने आज तक अपनी चूत को चटवाकर ही मज़ा लिया है, लेकिन आज तू एक बार इसके लंड को अपनी चूत में डलवाना, देख क्या मस्त मज़ा आता है चुदई करवाने में? देख इसका कैसा मुसल जैसा लंड है? ऊफफ्फ मुझे क्या मस्त मज़ा आ रहा है? चोद मुझे, आह्ह्ह्ह चोदो राजा मुझे शीतल तू भी आज ऐसा ही मज़ा लेना। फिर स्नेहा ने शीतल के मुँह को थोड़ा नीचे किया और अपना एक बूब्स उसके मुँह में डाल दिया, तब शीतल उसके दोनों बूब्स को बारी-बारी से चाटने और चूसने लगी थी। अब मेरा लंड स्नेहा की चूत में तूफान ला चुका था। फिर जिस तेज़ी से वो चुदवा रही थी उसको देखकर मुझे ऐसा लगने लगा था कि अब वो भी अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुकी है। अब उसने मेरे लंड को अपनी चूत के बीच में ज़ोर से दबा लिया था और वो ज़ोर-ज़ोर से आहे भरकर चिल्लाने लगी थी, ऊह्ह्ह्ह अब मेरी चूत का पानी निकलने वाला है ऊफ्फ्फ में अब झड़ने वाली हूँ, आईई मेरा पानी निकला यह निकला। अब स्नेहा ने अपनी चूत का पानी निकलते ही शीतल के चेहरे को ऊपर उठाकर अपने होंठ उसके होंठो में दे दिए और वो उन्हें चूसने लगी थी।

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फिर थोड़ी देर में वो मेरे ऊपर से उठ गयी, उसकी चूत की बहुत दिनों के बाद आज तमन्ना पूरी हुई थी, मैंने ज़्यादा देर ना करते हुए शीतल को घोड़ी बनने के लिए कहा। अब शीतल की अब तक केवल चूसी हुई बिना चुदी चूत की चुदाई के लिए मेरा लंड बड़ा ही उतावला हुए जा रहा था। फिर मैंने स्नेहा से कहा कि स्नेहा मेरी जान शीतल पहली बार चुदवा रही है, इसलिए थोड़ा दर्द तो होगा तुम इसके मुँह का चुम्मा लेते हुए इसके बूब्स को मसलती रहना। तभी शीतल ने कहा कि में घोड़ी बनकर नहीं रह सकती, तुम मुझे लेटे-लेटे ही चोदो। फिर मैंने उसको कहा कि कोई बात नहीं सीधी लेट जाओ और फिर इसके बाद मैंने उसके दोनों पैरों को उठाकर अपने कंधो पर रख लिया और साथ ही स्नेहा से कहा कि तुम जल्दी से जाकर तेल लेकर आओ, तो वो तुरंत गयी और तेल लेकर आ गयी। फिर उसने थोड़ा तेल मेरे लंड के टोपे पर लगाया और थोड़ा शीतल की चूत में लगा दिया और उसकी चूत में अपनी एक उंगली को डालकर थोड़ा अंदर की तरफ भी उसने तेल लगा दिया। अब मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर टीका दिया और धीरे-धीरे में अंदर करने लगा, उसको अभी तक दर्द का एहसास भी नहीं हुआ था, शायद चुसवाने की वजह से उसके साथ यह सब हो रहा था।
फिर मैंने अपने कूल्हों को थोड़ा पीछे किया और एक करारा धक्का अपने लंड का उसकी चूत में लगा दिया, जिसकी वजह से मेरा आधा लंड उसकी चूत में चला गया। अब शीतल मेरे लंड के अंदर घुसते ही दर्द की वजह से चिल्ला पड़ी, वो कहने लगी ऊह्ह्ह्ह अब मुझे छोड़ दो मुझे आह्ह्ह्ह बहुत दर्द हो रहा है ऊफफफ्फ बहुत दर्द हो रहा है, प्लीज अब तुम मुझे छोड़ दो मुझे नहीं चुदवाना। फिर उसी समय मैंने स्नेहा को इशारा किया, तो वो तुरंत ही शीतल के बूब्स को चूसने लगी, लेकिन उस समय मैंने अपनी तरफ से कोई हरकत नहीं कि। फिर दो-तीन मिनट के बाद शीतल का दर्द थोड़ा कम हुआ, तब मैंने अपने लंड को थोड़ा सा ही बाहर निकाला और वापस से एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया, इस वक़्त मेरा लंड उसकी चूत में पूरा का पूरा अंदर चला गया था, जिसकी वजह से शीतल दर्द से तड़प उठी थी। अब शीतल चीख उठी थी ऊह्ह्ह ऊऊईईई मेरी माँ में मर गयी, कोई बचाओ मुझे और यह सब कहते हुए उसकी आँखों से पानी भी निकलने लगा था। अब शीतल दर्द की वजह से तड़प रही थी और फिर उसने अपने दोनों हाथों से मुझे अपने ऊपर से धक्का देकर हटाना चाहा, लेकिन में मजबूती से उस पर चढ़ा रहा और अपने दोनों हाथों से उसके बूब्स को हल्के-हल्के मसलता रहा।

दोस्तों में अच्छी तरह से जानता था कि अगर में एक बार उसके ऊपर से हट गया तो यह वापस और कई दिनों तक मेरे साथ अपनी चुदाई करवाने के लिए तैयार नहीं होगी। अब स्नेहा भी अपने होंठो से उसके होंठो को चूमने लगी थी। फिर कुछ देर बाद जब उसका थोड़ा दर्द कम होने लगा और वो मुझे शांत नजर आई, तब मैंने हल्के-हल्के चार-पांच झटके दिए, लेकिन अब उसको वो दर्द पहले जितना नहीं हुआ था, लेकिन दर्द फिर भी तो हल्का सा हो ही रहा था। अब स्नेहा उसको संभाल रही थी, मैंने हल्का-हल्का अपने लंड को हिलाकर अंदर बाहर शुरू किया और फिर में कुछ देर बाद थोड़ा सा तेज हो गया। अब शायद उसको मज़ा आ रहा था, स्नेहा उसके बूब्स को चूस रही थी और में उसकी चूत में मध्यम गति से धक्के दे रहा था। अब उसकी दोनों आंखे बंद थी और उसकी चीखने की आवाज भी बंद हो चुकी थी। फिर चार-पांच मिनट की चुदाई के बाद उसने अपनी आंखे खोली और मेरी तरफ देखते हुए वो मुझसे बोली कि धीरे-धीरे क्या धक्के मार रहे हो? थोड़ा ज़ोर तो लगाओ ना। अब उसके मुहं से यह बात सुनकर मेरी बैचेनी पहले से ज्यादा बढ़ चुकी थी, में समझ गया था कि अब उसको चुदवाने में मज़ा आने लगा है और फिर मैंने अपने धक्कों की गति को बढ़ाना शुरू कर दिया।

अब मेरा लंड उसकी चूत को सटासट चोदने लगा था और पूरे कमरे में पच-पच की आवाज़ें गूंजने लगी थी, शीतल भी उसके एक हाथ को पकड़कर अपनी चूत से रगड़ने लगी थी और साथ ही अपने बूब्स को अपने हाथ से पकड़कर मसल रही थी। फिर वो दोनों लड़कियाँ सिसकियाँ ले रही थी और पूरा कमरा उनकी सिसकियों की आवाज़ से गूँज उठा था। अब एक तरफ शीतल चिल्ला रही थी उफ़फ्फ मेरी चूत में उंगली डाल और ज़ोर-ज़ोर से उंगली से चोद मुझे अपने अंगूठे से मेरा दाना मसल चोद मुझे अपनी उंगली से उफफफ्फ। तो दूसरी तरफ अपनी उंगली की गति को बढ़ाते हुए स्नेहा मुझसे कह रही थी आहह चोदो मुझे बहुत मज़ा आ रहा है, चोदो मुझे हाँ ज़ोर-ज़ोर से चोदो मुझे ऊफफ्फ वाह हाँ ऐसे ही तुम बस धक्के देते रहो। अब उसके मुहं से यह बात सुनकर जोश में आकर अचानक से मैंने अपने लंड की गति को पहले से ज्यादा बढ़ा दिया था और में अपने हाथ से स्नेहा के बूब्स को मसलने भी लगा था। फिर स्नेहा तो अपने हाथ से शीतल के बूब्स मसलने लगी थी और साथ ही शीतल अपनी उंगली से स्नेहा की चूत को चोद रही थी।

अब शीतल आनंद से चीख रही थी ऊह्ह्ह्ह हाँ ऐसे ही चोदो मुझे तुम बहुत अच्छे हो वाह मुझे क्या मस्त मज़ा आ रहा है? आज में पहली बार यह सब करके आसमान में उड़ रही हूँ और तभी उस कमरे में एक ज़ोरदार तूफान आ गया। अब हम तीनो एक-एक करके झड़ने लगे थे, पहले स्नेहा की चूत का फव्वारा निकला और फिर उसके बाद मेरा और शीतल का फव्वारा एक साथ निकला, उसके बाद मज़ा ही मज़ा। अब मेरे लंड का पानी अंदर ही निकलने लगा, कुछ देर बाद अपना लंड बाहर निकालकर शीतल के पेट पर बाकि का पानी में निकालने लगा, वाह मेरे लंड से क्या मस्त मोटी धार निकली? उफफफ्फ मुझे क्या मस्त मज़ा आ गया था। फिर हम तीनों वहाँ से उठे तब मैंने देखा कि वहाँ पर हम तीनो का रस और शीतल की चूत का खून भी निकला हुआ था। फिर इसके बाद स्नेहा और शीतल ने मुझे दोबारा से अपने बदन से चिपका लिया और फिर हम लोग दस मिनट की चुम्माचाटी के बाद अपने-अपने कपड़े पहनकर खड़े हो गये। तब उस समय स्नेहा ने मुझे बताया कि शीतल ने यह सब करने का प्लान बनाया था और उसने आज तक किसी से चुदवाकर मज़े नहीं लिए थे और मेरी तुमसे बहुत अच्छी दोस्ती है यह बात सोचकर तुम्हें बहाने से यहाँ बुलाया। अब मेरे घरवालों के आने का समय हो गया है, इसलिए अब तुम अपने घर के लिए निकल जाओ बचा हुआ काम हम दोनों कर लेंगे।

दोस्तों फिर उसके बाद में पूरी बात को सुनकर खुश होता हुआ कपड़े पहनकर अपने घर आ गया और में पूरी रात बस उस चुदाई के बारे में सोचता ही रहा, क्योंकि उस दिन में बहुत खुश था मुझे अपनी किस्मत के ऊपर बड़ा नाज था। अब हम लोगों को जब कभी भी कोई मौका मिला, उसी समय हम तीनो ने मिलकर चुदाई का भरपूर आनंद लिया और बहुत मज़े मस्ती से वो पल बिताए। अब में उम्मीद करता हूँ कि सभी पढ़ने वालों को जरुर यह मेरी सच्ची घटना पसंद आई होगी, दोबारा मेरे पास कुछ लिखने को हुआ तो में जरुर लेकर आप लोगों की सेवा में चला आऊंगा।


धन्यवाद …

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