खूनी चूत की चुदाई गाथा



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प्रेषक : सेम …

हैल्लो दोस्तों, में आपका सेक्सी सेम एक बार फिर से आप सभी की सेवा में हाज़िर हूँ। दोस्तों मुझे भी कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ने का बहुत शौक था, इसलिए ऐसा मैंने बहुत समय तक किया और उसके बाद मेरे मन में भी अपनी इन घटनाओं को लिखकर आप तक पहुँचाने के बारे में एक बार विचार आ गया। दोस्तों यह घटना तब मेरे साथ घटी जब मेरे पापा के एक बहुत पक्के दोस्त की लड़की जो राजस्थान से थी, वो चंडीगढ़ अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए आई थी और वो हमारे घर भी आने जाने लगी थी।

उसका नाम अनिता था और वो उम्र में 18 की थी, वो कुछ ही दिनों में हम सभी घरवालों से बहुत अच्छी तरह से घुलमिल गयी थी और वो मुझसे भी कभी कभी बहुत अच्छी तरह हंसकर बातें मजाक किया करती थी, लेकिन इतनी कमसिन हसीना को में भी अब मन ही मन अपना बनाना चाहता था और अपने लंड की नयी खुराक समझकर में उस पर लाईन मारने लगा था और शायद थोड़ा बहुत वो भी मुझे पसंद करने लगी थी। उसको किसी भी तरह की कोई भी पढ़ाई या दूसरी तरह की दिक्कत या समस्या होती, तो मुझसे मेरे पापा बोल देते थे कि में अनिता की थोड़ी सी मदद कर दूँ और में खुश होकर उसकी मदद भी कर देता था। फिर जब भी वो अपने सभी काम से फ्री होती तो वो हमारे घर आ जाती और रात को हमारे घर ही रहती, मेरी माँ के साथ ही सोती थी और अब में किसी अच्छे मौके की तलाश में था कि कब मेरी उसके साथ वो बात बनेगी। में अपने मन की इच्छा को कब पूरा करूंगा? फिर मुझे कुछ दिनों के बाद वो मौका मिल ही गया, जिसकी में तलाश में बहुत दिनों से था और अब में उससे दिल खोलकर बात करना चाहता था। एक दिन जब वो मेरे घर पर आई, तब उस दिन मेरी मम्मी और पापा किसी काम की वजह से कहीं बाहर गये हुए थे, में उनके चले जाते ही मन ही मन बहुत खुश था और उस लड़की के साथ कुछ करने के बारे में विचार बना रहा था कि तभी अचानक से मेरे घर के पड़ोस में रहने वाली एक छोटी लड़की जिसकी उम्र पांच साल और उसका नाम निकू था, वो हर कभी मेरे घर आ जाती थी, वो ना जाने कहाँ से आ गई? जो मेरे उस काम के लिए एक बहुत बड़ी रुकावट थी और अब में चाहता था कि कैसे भी में उसको हमारे घर से बाहर भेज दूँ।

अब में सोच ही रहा था कि इतने में निकू मेरे पास आ गई और उसके हाथ में एक किताब थी और उसने मुझसे कहा कि भैया यह सवाल मुझसे हल नहीं हो रहा है और अब मेरे पेपर भी बहुत पास है इसको हल करना मेरे लिए बहुत ज़रूरी है। तो मैंने उसकी समस्या की तरफ देखा, दोस्तों मुझे उसका हल भी आता था, लेकिन मैंने उससे कहा कि मुझे यह नहीं आता लेकिन कुछ इससे मिलताजुलता मिल जाए तब तो में इसको भी कर सकता हूँ। अब वो उदास होकर मुझसे कहने लगी, लेकिन मेरे पास तो कोई किताब ही नहीं है जिसको दिखाकर में आपसे इसका हल जान लूँ? दोस्तों मेरे मन में एक विचार आ गया, मेरा एक दोस्त जिसका नाम करन है उसके पास इसका हल देखने वाली वो दूसरी किताब ज़रूर होगी और मैंने यह बात उससे कही जिसको वो बड़ी अच्छी तरह से जानती थी और मेरी बात को भी ठीक तरह से समझ चुकी थी।

दोस्तों में आप सभी को बता दूँ कि करन हमारे पड़ोस का ही लड़का है और में अपना उस छोटी लड़की से बस पीछा छुड़ाना चाहता था, इसलिए में उसको अपने उस दोस्त के घर बहाने से भेज रहा था। फिर मैंने तुरंत उससे कहा कि तुम जाओ और वो किताब ले आओ, हो सकता है कि उसके बाद तुम्हारा यह काम आसान हो जाए, वो मेरी यह बात मान गयी और फिर उसने अनिता से कहा कि आप भी मेरे साथ चलो हम वो किताब लेकर आते है, क्योंकि वो अनिता को भी बहुत अच्छी तरह से जानती थी इसलिए उसको अपने साथ ले जाने लगी। फिर इस पर मैंने उससे कहा कि नहीं नहीं तुम अकेली ही जाकर वहां से वो किताब ले आओ तब तक में और अनिता इस पर कोई दूसरा हल है क्या, वो देखते है? दोस्तों मुझे पता था कि वो 10-15 मिनट में वापस आ जाएगी और वो जैसे ही गयी, मैंने तुरंत ही अपने घर का दरवाज़ा बंद कर दिया तो अनिता मेरी इस हरकत को देखकर बड़ी हैरान हुई और वो मन ही मन सोचने लगी कि में यह क्या कर रहा हूँ? में अब अनिता के पास चला गया और मैंने उससे कहा कि तुम बिल्कुल भी मत घबराओ, में तुम्हारे साथ ऐसी वैसी कोई भी हरकत नहीं करूँगा। अब मैंने उससे कहा कि अनिता में तुमसे कुछ बात करना चाहता हूँ, वो पूछने लगी हाँ बताओ तुम्हे मुझसे क्या कहना है? मैंने हिम्मत करके तुरंत ही उससे कहा कि अनिता में तुम्हे पसंद करता हूँ, मेरी इस बात को सुनकर वो शरमा गयी और अपना सर नीचे करके ज़मीन की तरफ देखने लगी। अब में थोड़ा और उसके करीब आ गया और में अपने दोनों हाथों को उसके कंधो पर रखकर उससे पूछने लगा क्या तुम भी मुझे पसंद करती हो? वो कहने लगी कि उसके मन में ऐसा कुछ भी नहीं है जैसा तुम सोच रहे हो, यह सब गलत है, तुम्हे ऐसा मेरे बारे में नहीं सोचना चाहिए।

अब मैंने उससे कहा कि अनिता तुम कुछ भी सोचो या करो, लेकिन मुझे उस पास कोई भी फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि में तुम्हे पसंद करता हूँ और तुम बहुत सुंदर हो, इसलिए में अब अपने मन को अपने काबू में नहीं रख सकता और अब में तुम्हे एक बार चूमना चाहता हूँ। फिर वो मेरे मुहं से यह सभी बातें सुनकर झट से चकित होते हुए मुझसे कहने लगी नहीं नहीं अभी कुछ भी नहीं, मुझे यह सब करना अच्छा नहीं लगता और वो तुरंत मेरे हाथ को झटककर बेडरूम की तरफ भाग गयी। फिर में भी उसके पीछे दौड़ पड़ा और उसको पकड़कर मैंने ज़ोर से बेड पर धकेल दिया और वो जैसे ही बेड पर गिरी और में भी उसके ऊपर गिर गया, जिसकी वजह से अब वो पूरी तरह से मेरे नीचे थी और में उसके ऊपर। अब मैंने अपने होंठो को उसके होंठो पर रख दिया और में करीब पांच मिनट तक उसको पागल की तरह चूमता प्यार करता रहा।

दोस्तों आप ही सोचो कि वो क्या मस्त द्रश्य होगा कि में उस समय क्या और कैसा महसूस कर रहा था? मुझे आज पहली बार सबसे अलग हटकर मज़ा आया था, जिसको में किसी भी शब्दों में लिखकर नहीं बता सकता। फिर पहले दो चार मिनट तक वो मेरा लगातार विरोध करती रही, लेकिन फिर धीरे धीरे उसका वो विरोध खत्म हो गया, क्योंकि उसको मज़े के साथ जोश भी आने लगा था और वो भी इसलिए मेरे साथ उस काम का आनंद लेने लगी थी। अब वो मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी, जिसकी वजह से अब में जन्नत में पहुंच गया था, हम दोनों उस नशे में पूरी तरह से धुत हो चुके थे और हमें कुछ भी पता नहीं था। फिर मैंने सही मौका देखकर उसके बूब्स को छुकर महसूस किया, लेकिन मुझे वैसा मज़ा नहीं आ रहा था जैसा मुझे उससे चाहिए था। अब मैंने इसलिए उसका मुड वो जोश देखकर उसके कपड़ो के अंदर अपने हाथ को डालना चाहता था और मैंने जब उसके बूब्स को पूरा पकड़ लिया, तो वो ऐसे ही बोली ओह्ह्ह्ह प्लीज छोड़ दो मुझे आह्ह्ह्ह वरना कोई आ जाएगा और वो हमें यह सब करते हुए देख लेगा प्लीज ऊफ्फ्फ छोड़ दो मुझे। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

दोस्तों उस समय में पूरी कोशिश में था कि आज ही में उसका चुदाई का काम खत्म करके इसका बेंड बजा दूँ, लेकिन मेरी किस्मत को शायद यह सब उस समय मंजूर नहीं था और में उससे आगे बढ़ पाता उससे पहले ही मुझे निकू के आने की आवाज़ सुनाई देने लगी। फिर में जल्दी से उसके ऊपर से हट गया और फिर हम दोनों ने तुरंत ही अपने अपने कपड़े ठीक कर लिए। दोस्तों उस दिन जो वो मेरे हाथ से निकलकर भागी और उसके बाद तो वो अगले चार पांच दिन तक मेरे घर आई ही नहीं, जिसकी वजह से में बहुत डर गया कि कहीं वो यह बात किसी को बता तो नहीं देगी ना? अगर उसने ऐसा किया तो फिर मेरी खैर नहीं है और अगर उसने मेरी माँ को इसके बारे में कुछ भी कहा तो मुझे बहुत मार पड़ेगी, लेकिन उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया और उसने किसी को कुछ नहीं बताया। फिर कुछ दिन बाद मेरी मम्मी, पापा को मेरे मामा के यहाँ जाना पड़ा और क्योंकि उस समय मेरे कॉलेज की पढ़ाई चल रही थी, इसलिए ना में उनके साथ गया और ना ही वो मुझे अपने साथ ले जाकर मेरी पढ़ाई में कोई रुकावट करना चाहते थे। यह भी मेरे लिए बहुत खुशी की बात थी कि अनिता यह नहीं जानती थी कि उस दिन मेरी मम्मी, पापा घर में नहीं है? वो कुछ दिनों के लिए बाहर गए है, में अपने घर में बिल्कुल अकेला हूँ और वो उसी दिन मेरे घर आ गयी, उसने दरवाजे पर लगी घंटी को बजाया तो मैंने तुरंत जाकर दरवाज़ा खोल दिया और फिर उसने मुझसे मेरी मम्मी के बारे में पूछा तो मैंने उससे कहा कि वो अंदर है जाओ बेडरूम में तुम्हारा ही इंतज़ार हो रहा है।

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फिर वो यह बात सुनकर झट से बिना कुछ सोचे समझे अंदर चली गयी, में भी उसके पीछे पीछे चला गया, लेकिन मुझे मन में यह डर भी था कि कहीं वो उस दिन के लिए मुझसे नाराज़ ना हो जाए? फिर मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया। अनिता कमरे से वापस बाहर आ गई और वो मुझसे कहने लगी कि अंदर तो कोई भी नहीं है, तुमने मुझसे झूठ क्यों बोला? तो इस बात पर में उसकी तरफ देखकर मुस्कुराया और फिर मैंने उससे कहा कि हाँ मेरी रानी अंदर कोई भी नहीं है, क्योंकि मुझे छोड़कर सभी लोग गाँव गये है और अब इस समय सिर्फ़ में और तुम ही घर पर है। तो वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर थोड़ी सी घबराकर दरवाजे की तरफ भागने लगी, लेकिन मैंने झपटकर उसको दबोच लिया और झट से अपनी बाहों में उठा लिया, मैंने उस स्तिथि में भी उसकी गांड को दबाने का मौका नहीं छोड़ा। अब में उसको सीधे अपने बेडरूम में ले गया और बेड पर मैंने उसको लेटा दिया, उसने मुझसे कहा कि प्लीज मुझे छोड़ दो जाने दो मुझे, कोई देख लेगा तो क्या कहेगा? मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया और बहुत प्यार से उसको समझाया कि अनिता तुम मुझसे बिल्कुल भी मर डरो, क्योंकि यह बात सिर्फ़ हम दोनों तक ही सीमित रहेगी और तुम तो यहाँ हर रोज़ आती हो, तो किसी बाहर वाले को तुम्हारे ऊपर शक भी नहीं होगा। अब तुम चुपचाप रहो और मुझे वो करने दो जो में तुम्हारे साथ करना चाहता हूँ। प्लीज तुम अब मुझे मत रोको और उससे यह बात कहते हुए मैंने अपने होंठो को उसके नरम, गुलाबी, रसभरे होंठो पर रख दिया में चूमने लगा।

फिर कुछ देर बाद उसने मेरा विरोध करना बिल्कुल बंद करके मेरा साथ देना शुरू किया और फिर में धीरे से अपना एक हाथ उसकी सलवार के नाड़े पर ले गया और मैंने उसको खोल दिया। अब उसने मेरा वो हाथ पकड़कर मुझसे कहा कि तुम्हे जो भी करना है ऊपर से करो तुम इसको क्यों उतार रहे हो? मैंने उससे कहा कि जानेमन इसके बिना हमें वो मज़ा नहीं आएगा और मैंने धीरे धीरे उसकी सलवार को नीचे लेकर पूरा उतार दिया। फिर वो हर बार मुझसे कहने लगी, प्लीज ऐसा मत करो प्लीज अब मुझे जाने दो छोड़ दो मुझे, लेकिन में उसकी किसी भी बात को सुनने के मूड में नहीं था। अब मैंने अपना पूरा ध्यान उसकी कमीज़ पर लगा दिया और उसकी कमीज़ को उतारने के लिए मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी, क्योंकि वो मेरी बात को नहीं मानी। अब एक बार फिर से मैंने उसको बहुत प्यार से समझाया कि देखो अनिता, में तुम्हे आज ऐसे ही जाने नहीं देने वाला, इसलिए तुम मुझे मज़े करने दो और में अपनी मनमानी कर लूँ।

दोस्तों मेरी इस बात को सुनकर उसका वो विरोध थोड़ा सा कम हो गया और मैंने भी सही मौका देखकर उसकी कमीज़ को भी नीचे उतार दिया, जिसकी वजह से अब वो मेरे सामने बस ब्रा और पेंटी में थी। दोस्तों मैंने देखा कि उसने काले रंग की ब्रा और उसी रंग की पेंटी पहनी थी, वो कितनी हसीन सुंदर लग रही थी, क्योंकि वो काला रंग उसके गोरे और चिकने बदन पर चमक रहा था, सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी। अब मेरे हाथ उसके पूरे चिकने बदन पर दौड़ रहे थे और वो हल्की सी सिसकियों के साथ बार बार मुझसे कह रही आह्ह्ह ऊफ्फ्फ्फ़ प्लीज छोड़ दो अब बस भी करो वरना कोई देख लेगा, लेकिन मेरे सर पर तो उसकी जवानी का भूत सवार हो चुका था, इसलिए मुझे उसके गोरे कामुक बदन के अलावा कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। में उसके बूब्स को ब्रा के ऊपर से ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था और उसका वो गदराया हुआ गोरा जिस्म देखकर मुझे अपनी ऋतु भाभी की याद आ गयी। दोस्तों वो अब भी मुझसे कह रही थी ऊह्ह्ह्हह आह्ह्ह्ह ज़रा धीरे प्लीज़ ज़रा धीरे मुझे दर्द हो रहा है, अब मैंने उसको चाटना शुरू किया। में उसके चेहरे से लेकर हाथ, पेट, पैर, जांघो पर उसको पागल की तरह चाट रहा था। फिर इतने में मेरी नज़र उसकी ब्रा पर चली गयी, मैंने मन ही मन में सोचा कि यह अब तक यहाँ क्यों है? इसको तो अब तक उतर जाना था और फिर मैंने उसकी ब्रा को भी उतार दिया और अब मैंने अपने कपड़े भी उतारने शुरू किए और धीरे धीरे में भी उसके सामने पूरा नंगा हो गया।

फिर यह सब देखकर उसने तुरंत ही अपनी आखों को बंद कर लिया और मैंने उसको एक बार फिर से अपनी बाहों में ले लिया और मैंने उसको किस किया। अब वो भी जोश में आकर मूड में आ गयी और अब वो भी मेरा साथ दे रही थी। अब मेरा लंड बहुत गरम और तनकर टाइट हो गया था। दोस्तों अब मुझे यह भी डर था कि अगर में ऐसे ही खेलता रहा तो कहीं मेरा यह लंड बाहर ही अपना लावा ना उगल दे? इसलिए मैंने अपना एक हाथ उसकी पेंटी पर रख दिया और उसकी चूत पर धीरे धीरे सहलाना शुरू किया, में छूकर महसूस कर रहा था कि अंदर का मौसम कैसा है? और फिर मुझे पता चला कि उसकी चूत गीली हो चुकी थी, मैंने बिना देर किए उसकी पेंटी को उतार दिया। अब वो मुझसे कहने लगी कि तुम यह मत करो, इससे पहले भी तुम इतना सब तो कर ही चुके हो प्लीज़ मुझे जाने दो, लेकिन मैंने उसकी उस बात पर बिल्कुल भी ध्यान ना देकर उसकी पेंटी को उतारकर फेंक दिया, जिसकी वजह से अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी लेटी हुई थी।

अब वो अपने दोनों हाथों से अपने गुप्त अंग को छुपाने की असफल कोशिश कर रही थी और में उसकी तरफ देखकर हंस रहा था, मैंने अपना हाथ उसके बूब्स पर रख दिया और हल्के से उसको दबा दिया, उसके साथ ही दूसरे बूब्स को में अपने मुहं में लेकर चूसने लगा। अब अनिता मज़े की वजह से सिसकियाँ लेने लगी वो आअहह प्लीज मर गई ऊफ्फ्फ मुझे गुदगुदी हो रही है, मैंने धीरे से अपना एक हाथ उसके दोनों पैरों के बीच में डाल दिया और उसके दोनों पैरों को अलग कर दिया और फिर में उसके पैरों के बीच में बैठ गया और में अपनी उँगलियों से उसकी चूत के दाने को टटोलने लगा। फिर कुछ देर बाद मैंने अपना एकदम टाइट लंड उसकी चूत के मुहं पर रखा और एक ज़ोर का झटका दिया, वो दर्द की वजह से बहुत ही ज़ोर से चिल्लाई आईईइ माँ में मर गई प्लीज आह्ह्ह्ह नहीं इसको बाहर निकालो वरना में मर जाऊंगी, प्लीज थोड़ा सा रहम करो ऊफ्फ्फ्फ़ प्लीज मुझे बड़ा तेज दर्द हो रहा है, वो यह बात कहते हुए ज़ोर ज़ोर से रोने लगी।

अब में उसकी वो हालत, रोना, दर्द को देखकर थोड़ा सा घबरा गया, लेकिन फिर मैंने बिना धक्के दिए उसको समझाते हुए उससे कहा कि अब तुम्हे ज्यादा दर्द नहीं होगा और फिर धीरे से मैंने उसको दूसरा झटका भी लगा दिया, जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड उसकी चूत के अंदर समा चुका था, लेकिन अब उसका वो दर्द पहले से भी ज्यादा बढ़ गया। अब इसलिए वो सिसकियाँ लेते हुए आह्ह्ह ऊफ़्फ़्फ़् करके बोली ऑश प्लीज बाहर निकालो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है आह्ह्ह्ह माँ में मर गयी। फिर मैंने थोड़ा सा अपने लंड को बाहर निकाला और फिर दोबारा अपने लंड को अंदर डाल दिया, थोड़ी देर बाद उसका वो दर्द कुछ कम हुआ और वो भी मेरे साथ अब अपनी चुदाई का मज़ा लेने लगी। मैंने एक बार फिर से एक ज़ोर का झटका लगाया और वो दर्द की वजह से चिल्ला उठी ऑश ऊउईईईई प्लीज धीरे करो धीरे ऊहह यह कैसा आनंद है? पूरे कमरे में प्लीज आह्ह्ह उफ्फ्फ और पूछ फक पच की आवाज़े आ रही थी। फिर करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद मेरा लंड झड़ने वाला था और उन धक्को के बीच उसकी भी चूत दो बार अपना पानी छोड़ चुकी थी, जिसकी वजह से मेरा लंड अंदर बाहर एकदम चिकना होकर फिसल रहा था और उसका दर्द भी खत्म हो गया था, इसलिए वो मेरे साथ मज़े ले रही थी।

अब मैंने उसका वो जोश देखकर उसको कसकर पकड़ा और ज़ोर से धक्के देकर चोदना शुरू किया और अब अनिता मुझसे कह रही थी प्लीज तुम मुझे ज़ोर से धक्के देकर चोदो, मारो तुम मेरी चूत को आअहह ऊफ्फ्फ्फ़ हाँ आज तुम जमकर मेरी चुदाई करो, तुम बहुत अच्छे हो वाह मज़ा आ गया आआहह प्लीज ओह्ह्ह्ह यह सब क्या है? में अब जन्नत के मज़े ले रही हूँ प्लीज आहह्ह्ह हाँ ऐसे ही मारो ज़ोर से तेज तेज धक्के मारो, तुम मुझे और भी मज़ा दो। फिर में भी उसकी बातें सुनकर पूरी तरह जोश में आकर उसकी मस्त चुदाई करने लगा। फिर कुछ देर धक्के देने के बाद में झड़ गया और उसकी चूत अब मेरे वीर्य से भर गयी थी, जो मेरे लंड ने उसकी चूत के अंदर छोड़ा था। अब मैंने देखा कि उसका चेहरा पूरी चुदाई होते ही खुशी से चमक गया, लेकिन बेड पर खून के दाग नजर आ रहे थे और यह उसके लिए दर्द भरा था, लेकिन यह उसके लिए एक नया अनुभव का सफ़र था, जिसकी वजह से उसका चेहरा चमक रहा था। अब वो खड़ी हुई, लेकिन उससे सही तरीके से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था और उसको अपनी पहली चुदाई की वजह से चूत में बहुत दर्द हो रहा था और वो खड़ी होकर मेरी छाती से लिपट गयी। अब वो मुझसे कहने लगी कि प्लीज तुम यह सब किसी से मत कहना, इसके बाद जब भी में फ्री रहूंगी तब में तुझसे अपनी ऐसी ही चुदाई के मज़े लेने आ जाउंगी। मुझे यह सब तुम्हारे साथ करके दर्द के साथ साथ मज़ा भी बहुत आया, जिसको में किसी भी शब्दों में नहीं बता सकती, लेकिन तुम मेरी कही उस बात को हमेशा अपने दिमाग में रखना और हम दोनों के इस नये सम्बन्ध इस काम के बारे में किसी तीसरे को पता कभी भी नहीं चलना चाहिए। फिर मैंने उसके चेहरे को अपने दोनों हाथो से पकड़कर अपने पास लाते हुए माथे पर चूमते हुए उससे कहा कि तुम मेरी तरफ से बिल्कुल भी चिंता मत करो, इस बारे में कुछ भी मत सोचो एकदम शांत रहो में हूँ ना, तुम्हे कुछ नहीं होने दूंगा और फिर वो कुछ देर मेरे साथ बैठकर बातें करके वापस अपने घर चली गई ।।

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