मेरे बाप का पाप



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प्रेषक : लाडली …

दोस्तों आज, में अपने जीवन की एक सच्ची घटना को आप तक पहुँचाने के लिए यहाँ पर आई हूँ। वैसे में में अब पूरी बीस साल की हो चुकी हूँ और में एक औरत मर्द के बिच बने हर एक रिश्ते को भी बहुत अच्छी तरह से समझती थी, क्योंकि अब मुझ में वो समझ पूरी तरह से आ चुकी थी। दोस्तों मैंने जब पहली बार कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानी को पढ़ा था तो उस दिन ही मैंने मन ही मन निश्चय कर लिया था कि में अपनी भी उस घटना को जरुर लिखूंगी और आज वो आपके सामने है। अब मेरी आप बीती को सुनकर थोड़े मज़े आप भी ले लीजिए। दोस्तों एक बार जब मैंने पहली बार अपने पापा को मेरी मम्मी की दमदार मस्त चुदाई करते हुए देखा तो मुझे वो सब इतना अच्छा मुझे उसको देखकर इतना मज़ा आया कि में अब हर दिन चोरीछिपे उनका वो खेल देखने लगी थी आप यह भी मान सकते है कि मेरी एक आदत सी हो गई थी ऐसा करने के लिए मुझसे मेरी प्यासी चूत कहती थी। अब में धीरे धीरे इतनी पागल हो चुकी थी कि मुझे अब चुदाई सेक्स के अलावा और कुछ भी नजर नहीं आ रहा था और में भी अब अपनी इस चूत की चुदाई करवाकर कैसे भी करके उसको वो मज़े देकर शांत करना चाहती थी। में उसके लिए नये नये विचार बनाने लगी थी और फिर में पापा की वो बहुत देर तक लगातार चुदाई को देखकर इतना मस्त हो गई थी कि में अब अपने पापा को फँसाने का वो जाल बुनने लगी और आख़िर एक दिन मुझे वो कामयाबी मिल ही गयी, मैंने अपने पापा को उसमे फँसा ही लिया।

दोस्तों अब जब भी मुझे कोई अच्छा मौका मिलता में अपने पापा की गोद में बैठकर उनसे अपने बूब्स को दबवा दबवाकर मज़े लेने लगी थी, लेकिन अभी तक केवल में अपने बूब्स को ही उनसे दबवा पाई थी और मैंने उनके साथ चुदाई का वो पूरा मज़ा अब तक नहीं लिया था, लेकिन मुझे उस पल का बहुत बेसब्री से इंतजार था। में जानबूझ कर ऐसे काम करती जिसकी वजह से मुझे मज़े मिले और वो मेरी तरफ ज्यादा आकर्षित हो जाए और फिर मेरी किस्मत का ताला उस दिन खुल गया। दोस्तों उन दिनों मेरे मामा की शादी थी इसलिए मेरी मम्मी अपने मायके जा रही थी और रात के समय पापा ने मुझे अपनी गोद में अपने खड़े लंड पर बैठाकर मुझसे कहा कि नेहा बेटी कल तेरी मम्मी तेरे मामा के घर पर चली जाएगी फिर तुझे कल में पूरा मज़ा देकर जवान होने का सही मतलब बताऊंगा। दोस्तों में पापा की वो बात सुनकर और उसका सही मतलब तुरंत समझकर बहुत खुश हो गयी थी। अब हमेशा पापा अपने बेडरूम की कोई ना कोई खिड़की को जानबूझ कर खुली रखते थे। उस वजह से में पापा को अपनी मम्मी को चोदते हुए आराम से देख सकूँ और उनको ऐसा करने के लिए मैंने ही कहा था। फिर उस रात को पापा ने मम्मी को एक कुर्सी पर बैठाकर उनकी चूत को चाटकर पापा ने दो बार झड़ने के लिए मजबूर कर दिया और फिर उसके बाद पापा ने उनको तीन बार बहुत जमकर चोदा। उसके बाद वो दोनों थककर सो गये, लेकिन मेरा जोश चुदाई का वो नशा उसके बाद पहले से ज्यादा बढ़ गया, जिसकी वजह से में बिल्कुल पागल हो चुकी थी और उसके अगले दिन मेरी मम्मी को भी शादी में जाना था, लेकिन में अपनी पढ़ाई का बहाना बनाकर अपने घर रुक रही थी। फिर उस दिन मम्मी जा रही थी और पापा ने मेरे कमरे में आकर मेरे बूब्स को पकड़कर दो तीन बार मेरे नरम रसीले होंठो को चूमा और मुझे अपनी बाहों में भरकर अपने लंड से मेरी चूत को दबाकर मुझसे कहा कि में अभी थोड़ी देर में तुम्हारी मम्मी को स्टेशन तक छोड़कर आता हूँ। फिर उसके बाद आज रात को में तुमको पूरा मज़ा दूंगा। में उनके मुहं से यह बातें सुनकर बड़ी खुश थी। अब पापा चले गये तो में उनके जाने के बाद घर में बिल्कुल अकेली रह गयी थी और में अपनी पेंटी को उतारकर अपने पापा की वापसी का इंतज़ार कर रही थी। मैंने मन ही मन में सोचा कि जब तक पापा नहीं आते तब तक में अपनी चूत को पापा के लंड के लिए अपनी उंगली से फैलाकर तैयार कर लेती हूँ। तभी कुछ देर बाद किसी ने दरवाज़ा खटखटाया, मैंने अपनी चूत में उंगली को आगे पीछे करते हुए पूछा कौन है? तब बाहर से आवाज आई में हूँ उमेश और फिर उमेश का नाम सुनकर में गुदगुदी से भर गई और मेरे पूरे शरीर में ना जाने कहाँ से वो जोश भर गया। में मन ही मन बहुत उत्साहित हो चुकी थी। दोस्तों उमेश मेरा बीस साल का पड़ोस में रहने वाला एक सुंदर दमदार लड़का था और वो भी मुझे पिछले कुछ दिनों से अपने जाल में फंसाना चाहता था, लेकिन में ही उसको जानबूझ कर अपनी तरफ से लाइन नहीं दे रही थी वो हर रोज़ जब भी मुझे देखता अपनी तरफ से गंदे गंदे इशारे किया करता था और वो कभी कभी तो मेरे पास में आकर मेरे बूब्स को भी दबा देता था और कभी वो सही मौका देखकर मेरी गांड पर भी अपना हाथ घुमा देता और वो हमेशा मुझसे कहता था कि रानी बस एक बार तुम मुझे चखा दो, तुम मुझे एक बार वो मौका दे दो। दोस्तों आज में अपनी प्यासी चूत में उंगली डालकर इतनी जोश से भरकर बेताब हो गयी थी कि आज उसके आने पर में इतनी मस्ती में भर गई कि मैंने बिना पेंटी पहने ही उठकर तुरंत दरवाज़ा खोल दिया।

फिर मुझे उसके उन इशारो से तुरंत पता चल चुका था कि वो मुझे आज चोदना चाहता है और आज में भी ज्यादा जोश में होने की वजह से अपने पूरे होश खोकर उससे अपनी चुदाई करवाने के लिए बिल्कुल तैयार थी और आज सुबह ही मैंने देखा था कि पापा ने मम्मी को एक कुर्सी पर बैठाकर उनकी चूत को अपनी जीभ से चाटकर उनको चोदा था और अब मेरी मम्मी के भाई की शादी थी इसलिए वो पूरे एक सप्ताह के लिए बाहर गई हुई थी और कुछ देर पहले मुझसे मेरे पापा ने कहा था कि आज वो मुझे पूरा मज़ा देंगे और इसके पहले पापा ने कई बार मेरे गदराए बूब्स को दबाकर मुझे बहुत मज़ा दिया था। अब में घर में बिल्कुल अकेली होने के साथ साथ मैंने अपनी पेंटी को उतारकर अपनी चूत में एक उंगली को डालकर में मज़ा ले रही थी जिससे कि जब पापा का मोटा लंड मेरी इस कामुक चूत में जाए तब मुझे उतना दर्द ना हो। दोस्तों पापा के आने से पहले उमेश के आ जाने पर मैंने सोचा कि जब तक पापा नहीं आते तब तक क्यों ना में इसी से एक बार अपनी चूत को चुदवाकर इसके साथ भी वो मज़ा ले लूँ? मैंने अपने मन में यही बात सोचकर दरवाज़ा खोल दिया था। फिर मैंने जैसे ही दरवाज़ा खोला उमेश तुरंत अंदर आ गया और वो मुझे उस हालत में देखकर खुश हो गया। वो मेरे बड़े आकार के बूब्स को पकड़कर मुझसे बोला कि हाए मेरी रानी आज हमारे पास यह एक बहुत अच्छा मौका है और क्यों ना आज हम इसका पूरा पूरा फायदा उठाकर थोड़े मज़े मस्ती कर लें। अब में उसकी उस हरकत पर एकदम से सनसना गई और उसने उसी समय मेरे बूब्स को छोड़कर पलटकर दरवाज़ा बंद किया और फिर उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और वो मेरे दोनों बूब्स को मसलते हुए मेरे गुलाबी होंठो को चूसने लगा और वो मुझसे कहने लगा कि मेरी रानी तुम्हारे बूब्स तो बहुत टाईट है उफ्फ्फ इन्होने मुझे हमेशा बहुत तड़पाया है, मेरी रानी आज में तुम्हें ज़रूर चोदूंगा। फिर में उससे बोली आह्ह्हह्ह हाए भगवान तुम यह क्या कर रहे हो, प्लीज अब जल्दी से चोद दो मुझे वरना पापा आ जाएँगे? तो वो कहने लगी कि तुम बिल्कुल भी मत डरो मेरी जान, क्योंकि में तुम्हे बहुत जल्दी से चोदकर मज़े दूंगा और वैसे भी मेरा लंड थोड़ा छोटा है इसलिए तुम्हे इतना दर्द भी नहीं होगा और अब वो मेरी गांड को सहलाते हुए बोला कि वाह आज तुमने पेंटी भी नहीं पहनी है यह तो बहुत अच्छा है। फिर मैंने उससे कहा कि में तो आज अपने पापा से अपनी चुदाई करवाने के जुगाड़ में नंगी बैठी थी, लेकिन यह एक सुनहरा मौका तेरी अच्छी किस्मत से तुझे मिल गया। दोस्तों में तो पापा से अपनी चुदाई करवाने के लिए पहले से ही बहुत गरम थी और जब उमेश अंदर आकर मेरे मुलायम बूब्स और गोरे गालों को मसलने लगा तो में अब पापा के आने से पहले ही उमेश के साथ वो मज़ा लेने को बिल्कुल बेकरार हो गयी। मुझे उसकी उस छेड़छाड़ में बड़ा मज़ा आ रहा था और मेरी चूत अब पापा का लंड खाने से पहले ही उमेश का लंड खाने को बहुत बेताब हो चुकी थी। अब में अपनी गोरी पतली कमर को लचकाकर बोली उह्ह्ह्ह उमेश तुम्हे जो करना हो जल्दी से कर लो, कहीं पापा ना आ जाए और मैंने अपनी चुदाई के लिए पागल होते हुए उससे यह बात कही। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर उमेश ने तुरंत मेरा इशारा पाकर मुझे बेड पर लेटा दिया और वो अपनी पेंट को भी उतारने लगा। वो झट से पूरा नंगा होकर बोला कि रानी आज तुम्हे बड़ा मज़ा आएगा और तुम एकदम मस्त सेक्सी माल हो, देखो मेरा लंड छोटा है ना? उसने मेरे हाथ में अपने लंड को रख दिया। फिर में उसके चार इंच के खड़े लंड को पकड़ मस्त हो गयी और मन ही मन सोचने लगी कि इसका तो मेरे पापा के लंड से आधा है और फिर में उसके लंड को सहलाती हुई उससे बोली हाए राम जो भी करना है जल्दी से कर लो। दोस्तों उमेश के लंड को पकड़ते ही मेरा बदन कांपने लगा और पहले में थोड़ा सा डर रही थी, लेकिन अब में उसका लंड पकड़कर मचल उठी और मेरे कहने पर वो मेरे दोनों पैरों के बीच में आ गया और मेरी कसी हुई कुँवारी चूत पर अपना छोटा लंड रखकर उसने धक्का मार दिया, जिसकी वजह से उसके लंड का टोपा कुछ अंदर चला गया और फिर उसने तीन चार धक्के मारकर अपना पूरा लंड मेरी चूत के अंदर डाल दिया और कुछ देर के बाद उसने मुझे धीरे धीरे धक्के देकर चोदते हुए मुझसे पूछा, मेरी जान तुम्हे ज्यादा दर्द तो नहीं हो रहा है ना, क्यों मज़ा आ रहा है ना? उफ्फ्फफ्फ्फ़ हाँ आह्ह्हह्ह तुम ऐसे ही ज़ोर से धक्के मारो, मुझे बहुत मज़ा आ रहा है। फिर मेरी बात को सुनकर वो तेज़ी से धक्के मारने लगा और में उससे अपनी चुदाई करवाते हुए बहुत मस्त हो रही थी। उसकी चुदाई मुझे जन्नत की सेर करवा रही थी और में नीचे से अपनी गांड को उचकाती हुई सिसकियाँ लेती हुई उससे बोली उफफ्फ्फ्फ़ उमेश ज़ोर ज़ोर से चोदो तुम्हारा लंड बहुत छोटा है, ज़रा ताक़त से चोदो मेरे राजा। फिर मेरी बात को सुनकर उमेश अब मुझे ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा था। उसका छोटा सा लंड सरकता हुआ मेरी चूत में अंदर बाहर हो रहा था और में पहली बार चुद रही थी इसलिए मुझे उमेश के छोटे लंड से भी बहुत मज़ा आ रहा था और वो इसी तरह मुझे धक्के देकर चोदते हुए मुझे जन्नत का मज़ा देने लगा। फिर करीब दस मिनट के बाद वो मेरे बूब्स पर लुढ़क गया और कुत्ते की तरह हांफने लगा और उसके लंड से बाहर निकलकर उसका वो गरम, गरम पानी मेरी चूत में गिरने लगा था। में पहली बार चुदी थी और पहली बार मेरी चूत में किसी के लंड की मलाई गिरी थी इसलिए मज़े से भर में उससे चिपक गयी और मेरी चूत भी अब टपकने लगी, कुछ देर बाद हम लोग अलग अलग हुए। फिर वो मेरे पापा के आ जाने की बात से डरकर जल्दी से उठकर अपने कपड़े पहनकर चला गया। तब मैंने अपने एक हाथ से छूकर महसूस किया कि अब मेरी चूत उस वीर्य की वजह से चिपचिपा गयी थी और उमेश मुझे वैसे ही छोड़कर चला गया था, लेकिन उसकी इस हिम्मत भरी हरकत से में बहुत खुश थी और उसने आज मुझे चोदकर बता दिया था कि चुदवाने में कितना और कैसा मज़ा आता है? उमेश मुझे ठीक से चोद नहीं पाया था और वो बस ऊपर से ही मेरी चूत को रगड़कर चला गया था, लेकिन में आज बहुत अच्छी तरह से जान गई थी कि चुदाई में बड़ा ही अनोखा मज़ा है और उसके चले जाने के बाद मैंने अपनी पेंटी को पहन लिया था।

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अब में मन ही मन में सोच रही थी कि जब उमेश के छोटे लंड से मुझे अपनी चुदाई करवाने में इतना मज़ा आया है तो जब पापा उनका मोटा, लंबा, तगड़ा लंड मेरी इस चूत में डालेंगे तब मुझे कितना मज़ा आएगा? फिर उमेश के जाने के 6-7 मिनट बाद ही पापा स्टेशन से वापस आ गये। वो अंदर आते ही मेरे बूब्स के खड़े खड़े निप्पल को फ्रॉक के ऊपर से पकड़ते हुए बोले कि आओ बेटी अब में तुमको जवान होने का सही मतलब बताऊंगा। फिर मैंने उनसे कहा ओहह पापा आपने तो कहा था कि आप मुझे रात को वो सब बताएँगे, अब वो कहने लगे अरे अब तो मम्मी चली गयी है अब हर समय रात ही है तुम अपनी मम्मी के कमरे में ही आ जाओ और वो क्रीम भी लेती आना, पापा मेरे बूब्स को मसलते हुए यह सब बोले। दोस्तों में उमेश से चुदवाकर पहले ही जान चुकी थी कि उस क्रीम का क्या होगा, लेकिन में उनसे बिल्कुल अंजान बनकर पूछने लगी कि पापा क्रीम क्यों? अरे तुम लेकर तो आओ तब में बताऊंगा और पापा मेरे बूब्स को इतने ज़ोर से कसकर मसल रहे थे कि जैसे वो मेरे बूब्स को आज उखाड़ ही लेंगे। अब में क्रीम और टावल लेकर मम्मी के बेडरूम में पहुंची में उस समय बहुत खुश थी क्योंकि में जानती थी कि पापा ने वो क्रीम मुझसे क्यों मंगवाई है? में उमेश से चुदने के बाद क्रीम का मतलब समझ गयी थी और अब पापा मुझे लड़की से औरत बनाने के लिए बेकरार थे और में भी अपने पापा का मोटा केला खाने को तड़प रही थी। फिर में कमरे में पहुँची तो पापा मुझसे बोले कि बेटी क्रीम टेबल पर रखकर बैठ जाओ और में गुदगुदाते हुए मन से कुर्सी पर बैठ गयी तो पापा मेरे पीछे आ गए और वो अपने दोनों हाथ मेरी खड़ी निप्पल पर ले आए और दोनों को वो बहुत प्यार से दबाने लगे। पापा के हाथ से अपने बूब्स को दबवाने में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। तभी पापा ने अपने एक हाथ को गले के ऊपर से मेरी फ्रॉक के अंदर डाल दिया और वो मेरे नंगे बूब्स को दबाने सहलाने लगे। मैंने उस समय फ्रॉक के नीचे कुछ नहीं पहना था और पापा मेरे बूब्स के खड़े निप्पल को अपनी मुठ्ठी में भरकर दबा रहे थे और साथ ही वो मेरे दोनों बूब्स को भी मसल रहे थे। उस वजह से में मस्ती से भरी मज़ा ले रही थी। तभी पापा ने मुझसे पूछा, क्यों बेटी तुमको अच्छा लग रहा है? तो मैंने कहा कि हाँ पापा मुझे बहुत मज़ा आ रहा है और वो कहने लगे कि तुम इसी तरह कुछ देर बैठो, क्योंकि आज में तुमको शादी से पहले ही शादी वाला पूरा मज़ा देता हूँ क्योंकि अब तुम जवान भी हो गयी हो और तुम यह मज़े लेने के लायक भी हो गयी हो, आज में तुमको बहुत मज़े दूंगा। जब में इस तरह से तुम्हारे बूब्स को दबाता हूँ तब तुम्हे कैसा लगता है? पापा मेरे खड़े बूब्स को निचोड़कर बोले, तो में एकदम उतावली होकर बोली उफ्फ्फ हाए पापा ऊहह्ह्ह सीईईईईइ इस तरह तो मुझे और भी अच्छा लगता है जब तुम कपड़े उतारकर नंगी होकर मज़ा लोगी तब और भी ज़्यादा मज़ा आएगा, वाह तुम्हारे बूब्स बड़े मस्त है।

फिर मैंने पापा से पूछा कि मेरे बूब्स इतने छोटे क्यों है? मम्मी के तो बहुत बड़े है? वो कहने लगे कि तुम घबराओ मत बेटी तुम्हारे बूब्स को भी में तुम्हारी मम्मी की तरह बड़ा कर दूँगा। बेटी तुम अपने पूरे कपड़े उतारकर नंगी होकर बैठो तब बड़ा मज़ा आएगा। फिर मैंने उनसे पूछा पापा क्या में अपनी पेंटी को भी उतार दूँ? में उस समय बिल्कुल अंजान बनी हुई थी, वो बोले कि हाँ बेटी तुम अपनी पेंटी को भी उतार दो लड़कियों का असली मज़ा तो उनकी पेंटी में ही होता है। आज में तुमको वो सारी बातें बताने वाला हूँ, जब तक तुम्हारी शादी नहीं होती तब में ही तुमको शादी वाला मज़ा दूँगा और तुम्हारे साथ में ही सुहागरात मनाऊंगा तुम्हारे बूब्स बहुत टाइट है और पापा मेरी फ्रॉक के अंदर अपना एक हाथ डालकर मेरे दोनों को बूब्स को दबातें हुए बोले कि बेटी अब तुम नंगी हो जाओ। दोस्तों जब पापा ने मेरे बूब्स को मसलते हुए मुझे अपने कपड़े उतारने के लिए कहा तब मुझे पूरा विश्वास हो गया था कि आज मुझे अपने पापा के लंड का असली मज़ा मिलेगा और में उनके लंड को खाने की बात को सोचकर गुदगुदा गयी थी। उसके साथ में अपनी मम्मी की रंगीन चुदाई को याद करती हुई कुर्सी से नीचे उतरी और अपने कपड़े उतारने लगी, उसके बाद में अपने पूरे कपड़े उतारकर नंगी होकर मम्मी की तरह ही अपने दोनों पैरों को फैलाकर उस कुर्सी पर बैठ गयी। दोस्तों मेरे छोटे छोटे बूब्स तने हुए थे और अब मुझे ज़रा सी भी शरम नहीं आ रही थी। मेरी दोनों गोरी जाँघो के बीच मेरी चूत पापा को साफ दिख रही थी और पापा मेरी गदराई हुई चूत को बहुत गौर से देख रहे थे। मेरी चूत का वो गुलाबी छेद बड़ा मस्त था, अब पापा अपने एक हाथ से मेरी गुलाबी कली को सहलाते हुए बोले हे राम बेटी तुम्हारी तो जवान हो गयी है। फिर मैंने उनसे पूछा पापा मेरी क्या जवान हो गयी है? तब वो कहने लगे कि अरे बेटी तुम्हारी चूत जवान हो गई है। फिर उन्होंने मेरी चूत को ज़ोर से दबा दिया और पापा के हाथ से मेरी चूत के दबाए जाने पर में एकदम सनसना गयी और में मस्ती से भरी अपनी चूत को देख रही थी। तभी पापा ने अपने अंगूठे को क्रीम से चुपड़कर मेरी चूत में डाल दिया। वो मेरी चूत को उस क्रीम से चिकनी कर रहे थे। अब अंगूठा अंदर जाते ही मेरा बदन कांप गया और तभी पापा ने मेरी चूत से उनका अंगूठा बाहर किया तो वो उस पर लगे मेरी चूत के रस को देखकर बोले कि बेटी यह क्या है? क्या तुमने किसी से चुदवाकर मज़ा लिया है? में अब अपने पापा के अनुभव को देखकर एकदम दंग रह गयी और में घबराकर अंजान बनती हुई उनसे बोली कैसा मज़ा पापा? बेटी क्या यहाँ कोई आया था? नहीं पापा यहाँ तो कोई भी नहीं आया, तो फिर तुम्हारी चूत में यह गाढ़ा रस कैसा? वो मुझे क्या पता? पापा जब आप मेरे बूब्स को मसल रहे थे शायद तब कुछ गिरा था में बहाना बनाकर बोली। फिर वो कहने लगे कि लगता है तुम्हारी चूत ने एक बार पानी छोड़ दिया है। फिर पापा मुझे टावल देकर बूब्स को मसलते हुए बोले लो तुम इस टावल से साफ कर लो।

अब मैंने पापा से टावल को लेकर अपनी चूत को रगड़ रगड़कर साफ किया और पापा को उमेश वाली बात पता नहीं चलने दी। में अब अपने बूब्स को मसलवाते हुए पापा से खुलकर गंदी बातें कर रही थी ताकि में सभी कुछ जान सकूँ और वो मुझसे पूछने लगे बेटी जब में तुम्हारे बूब्स को दबाता हूँ तब तुम्हे कैसा लगता है? मैंने उनको जवाब दिया उफफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्ह पापा तब मुझे जन्नत जैसा मज़ा मिलता है और वो मुझसे पूछने लगे क्यों बेटी तुम्हारी चूत में भी तुम्हे अब कुछ महसूस होता है? अब में उनके सामने थोड़ा सा बेशरमाकर बोली मैंने कहा कि हाँ पापा मुझे बड़ी गुदगुदी हो रही है, तो वो मुझसे कहने लगे हाँ में अब ज़रा सा तुम्हारे बूब्स को और दबा लूँ। फिर उसके बाद में तुम्हारी चूत को भी मज़ा देता हूँ, बेटी तुम यह बात किसी को मत बताना। फिर मैंने कहा उफ्फ्फ हाँ पापा इसमे बहुत मज़ा है और किसी को कुछ भी नहीं पता चलेगा। अब पापा मेरे बूब्स को लगातार मसलते रहे और में उनके साथ जन्नत का मज़ा लेती रही। फिर कुछ देर बाद में एकदम से तड़पकर बोली ऊह्ह्ह्ह उह्ह्हह्ह पापा प्लीज अब आप बंद करो यह बूब्स को दबाना और अब आप अपनी बेटी की चूत का मज़ा लो। दोस्तों अब में भी अपने पापा के साथ खुलकर बातें कर रही थी और उस समय हम दोनों बाप, बेटी पति, पत्नी थे। फिर पापा मेरे बूब्स को छोड़कर अब मेरे सामने आ गए उस समय पापा का मोटा लंड तनकर खड़ा होकर मेरी आँख के सामने फुदकने लगा था। मैंने लंड तो पापा का पहले भी देखा था, लेकिन इतनी पास से में आज पहली बार देख रही थी इसलिए मेरा मन अब उसको लपककर पकड़ने को ललचाने लगा था और फिर मैंने उसको पकड़ लिया और में दबाने लगी। अब मेरी चूत पापा के मस्त लंड को देखकर अपनी लार टपकाने लगी थी, में पापा के केले को पकड़कर बोली आशशश पापा आपका लंड बहुत मोटा है और यह इतना मोटा मेरी चूत के अंदर भला कैसे जाएगा? तो वो बोले कि अरे पगली मर्द का लंड हमेशा ऐसा ही होता है और मोटे से ही तो असली मज़ा आता है, लेकिन पापा मेरी चूत तो बहुत छोटी है? फिर वो कहने लगे कि कोई बात नहीं बेटी तुम देखना तुम्हे वो पूरा मज़ा जाएगा, लेकिन पापा इससे तो मेरी आज फट ही जाएगी? अरे बेटी नहीं फटेगी, तुम इससे एक बार चुद जाओगी तो हर रोज़ चुदवाने के लिए तड़पती रहोगी और अब तुम अपने दोनों पैरों को फैलाकर अपनी चूत को खोल दो, क्योंकि सबसे पहले में अपनी बेटी की चूत को चाट लेता हूँ और फिर उसके बाद में चुदाई करूंगा। अब में समझ गयी थी कि पापा मम्मी की तरह मेरी चूत को चाटना चाहते है और मैंने जब मम्मी को उनकी चूत चटवाते हुए देखा था तभी से में मन ही मन में सोच रही थी कि काश पापा मेरी चूत को भी एक बार चाटते। अब जब पापा ने मुझसे मेरी चूत को फैलाने के लिए कहा तो मैंने तुरंत अपने दोनों हाथ से अपनी चूत की दरार को फैलाकर पूरा खोल दिया। अब पापा अपने घुटनों के बल नीचे बैठ गये और वो मेरी रोयेदार चूत पर अपने होंठो को रख चूमने लगे। फिर पापा के पहली बार चूमने पर में कांप गयी। फिर दो चार बार चूमने के बाद पापा ने अपनी जीभ को मेरी चूत के चारों तरफ चलाते हुए उन्होंने अब मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया और वो हल्के हल्के मेरे बाल भी चाट रहे थे, जिसकी वजह से मुझे ग़ज़ब का मज़ा आ रहा था। अब पापा मेरी चूत को चाटते हुए चूत का दाना भी चाट रहे थे में उस वजह से बड़ी मस्त थी और उमेश तो बस मुझे जल्दी से चोदकर चला गया उसने मेरे बूब्स भी नहीं दबाए थे जिसकी वजह से कुछ मज़ा और जोश नहीं आया था, लेकिन पापा तो एकदम चालाक समझदार खिलाड़ी की तरह मुझे वो पूरा मज़ा दे रहे थे और उन्होंने मेरी चूत के बाहर से चाट चाटकर पूरा गीला कर दिया था।

अब पापा मेरी चूत की दरार में अपनी जीभ को चला रहे थे और कुछ देर तक इसी तरह से करने के बाद पापा ने अपनी जीभ को मेरी गुलाबी चूत के छेद में डाल दिया और जब उनकी जीभ मेरी चूत के छेद में गयी तो मेरी हालत पहले से ज्यादा खराब हो गयी और में अब उस मस्ती से तड़प उठी क्योंकि पहली बार मेरी चूत चाटी जा रही थी और मुझे उसमे इतना मज़ा आया कि में नीचे से अपने कूल्हों को उछालने लगी, कुछ देर बाद पापा मेरी चूत को चाटकर अलग हुए और अब उन्होंने अपने खड़े लंड को मेरी चूत पर लगा दिया वो अपने लंड से मेरी चूत को रगड़ने लगे थे। दोस्तों कुछ देर पहले चूत की चटाई के बाद अब उनके लंड की रगड़ाई ने मुझे बिल्कुल पागल बना दिया था और में अपने उतावलेपन से पापा से कहने लगी उफ्फ्फ्फ़ प्लीज पापा अब आप चोद भी दो मेरी चूत को आअहह ऊऊहह। फिर पापा ने मेरी तड़पती हुई उस आवाज़ पर मेरे बूब्स को उसी समय ज़ोर से कसकर पकड़कर अपनी कमर को थोड़ा सा ऊपर उठाकर धक्का मार दिया। फिर एक करारा धक्का लगने पर पापा का आधा लंड मेरी चूत में चला गया और पापा का मोटा और लंबा लंड मेरी छोटी सी चूत को ककड़ी की तरह चीरकर अंदर घुसा था और लंड के आधा अंदर जाते ही में दर्द से तड़पकर उनसे बोली आअहह्ह्ह ऊऊईईईई स्सीईईइ माँ में मर गयी पापा, प्लीज धीरे धीरे पापा आपका बहुत मोटा है उफ्फ्फ्फ़ पापा मेरी चूत इससे अब पूरी तरह से फट गयी है, मुझे बहुत अजीब सा दर्द हो रहा है, में मर जाउंगी प्लीज।

दोस्तों पापा का वो मोटा और लंबा लंड मेरी चूत में एकदम कसा हुआ था। मेरे उस दर्द और करहाने की वजह से पापा ने उसी समय धक्के मारना बंद कर दिया और उन्होंने मेरे बूब्स को मसलना शुरू किया। अब मुझे कुछ देर बाद दोबारा थोड़ा सा मज़ा आने लगा था। फिर करीब 6-7 मिनट बाद मेरा वो दर्द एकदम खत्म हो गया था और अब पापा अपने लंड को मेरी चूत में बिना रुके लगातार धक्के लगा रहे थे जिसकी वजह से धीरे धीरे पापा का पूरा लंड मेरी चूत की झिल्ली को चीरता फाड़ता हुआ अंदर घुस गया, लेकिन में दोबारा उस दर्द से छटपटाने लगी थी और मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरी चूत में चाकू घुसाया है जिसने मेरी चूत के सभी जगह से छीलकर दर्द जलन पैदा कर दी थी और जिसको अब सहना मेरे लिए बहुत मुश्किल था। अब में अपनी कमर को झटकते हुए बोली उफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्ह पापा आज मेरी फट गयी है, प्लीज अब इसको बाहर निकालो मुझे नहीं चुदवाना। फिर पापा अपना लंड डालते हुए मेरे गाल चाट रहे थे और वो मेरे गाल चाटते हुए मुझसे बोले कि बेटी रो मत, अब तो पूरा चला गया, हर लड़की को पहली बार दर्द होता है, लेकिन फिर मज़ा भी उसको उतना ही आता है। दोस्तों कुछ देर के बाद मेरा करहाना अब बंद हुआ तो पापा मुझे धीरे धीरे धक्के देकर चोदने लगे। पापा का लंड कस कसकर मेरी चूत के अंदर आ जा रहा था और अब सच में मुझे मज़ा आ रहा था। अब जब भी पापा ऊपर से धक्का लगाते तो में भी नीचे से अपनी गांड को उछालने लगती और उमेश तो मुझे केवल ऊपर से रगड़कर चोदकर चला गया था, मेरी असली चुदाई तो अब मेरे पापा कर रहे थे। फिर देखते ही देखते पापा ने अपना पूरा लंड मेरी चूत के अंदर तक डाल दिया था। फिर मैंने महसूस किया कि पापा का लंड तो उमेश के लंड से बहुत दमदार और मज़ेदार था।

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फिर जब पापा धक्का लगाते तो उनके लंड का टोपा मेरी बच्चेदानी तक छू जाता। मुझे आज जन्नत के मज़े से भी अधिक मज़ा मिल रहा था। तभी पापा ने मुझसे पूछा क्यों बेटी अब तुम्हे दर्द तो नहीं हो रहा है ना? तो मैंने उनसे कहा कि नहीं पापा अब तो मुझे बहुत मज़ा आ रहा है आह्ह्हहह पापा और ज़ोर ज़ोर से आप मुझे धक्के देकर चोदो और पापा इसी तरह करीब बीस मिनट तक लगातार धक्के देकर मुझे चोदते रहे और फिर बीस मिनट के बाद पापा के लंड से गरम गरम मलाईदार पानी मेरी चूत में गिरने एक एक बूंद टपकने लगी, जिसको में बहुत अच्छी तरह से महसूस कर रही थी और जब पापा का वीर्य मेरी चूत में गिरा तो में पापा से चिपक गयी और मेरी चूत भी झड़ने लगी। उस समय हम दोनों साथ ही झड़ रहे थे। दोस्तों पापा ने मुझे उस रात को पूरी रात चोदा और जब रात भर चुदाई से थककर दूसरे दिन दोपहर 12 बजे सोकर उठे तो मैंने पापा से पूछा कि पापा आज फिर से आप मेरी चुदाई करोगे? तो वो हंसकर कहने लगे अरे मेरी जान अब में बेटीचोद बन गया हूँ और अब तो में तुझे हर रोज़ ही चोदकर मज़े दूंगा, क्योंकि अब तू मेरी दूसरी बीवी है, लेकिन पापा जब मम्मी आ जाएँगी तो क्या करोगे? अरे मेरी जान उसको तो में बस एक बार चोद दूँगा और वो ठंडी हो जाएगी और फिर में तेरे कमरे में आ जाया करूँगा। दोस्तों में फिर उस अपनी पहली चुदाई के बाद से पापा के साथ हर रोज़ सुहागरात मनाने लगी थी। मुझे उनके साथ ऐसा करने में बड़ा मज़ा आने लगा था और में भी अब पूरे जोश में आकर उनके साथ अपनी चुदाई के पूरे पूरे मज़े लेने लगी। उन्होंने मुझे हर बार चोदकर संतुष्ट किया। दोस्तों यह थी मेरी वो कहानी जिसको में आप तक पहुँचाने के बारे में बहुत दिनों से सोच विचार कर रही थी ।।

धन्यवाद …

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