पापा और भाई की रंडी बनकर चुद गई



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प्रेषक : प्रीति …

हैल्लो दोस्तों, में प्रीति आज आप सभी कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ने वालों के लिए अपनी एक अनोखी कहानी लेकर आई हूँ जिसमें मैंने अपने भाई और अपने पापा के लंड से अपनी चुदाई का खेल खेला और उनके साथ मज़े लिए और अपने मन को वो सुख दिया। दोस्तों मेरे मम्मी पापा का बहुत साल पहले तलाक हो गया था, जिसकी वजह से हम हमारे घर में बस तीन लोग, में प्रीति, मेरा भाई जिसका नाम मोहन और मेरे पापा ही थे। में बहुत गोरी और मेरे बड़े आकार के सुडोल बूब्स, मटकती गांड जो मेरी इस चढ़ती मस्त जवानी को चार चाँद लगा रहे थे, क्योंकि मैंने अभी अभी अपनी जवानी की उस दहलीज पर अपना पहला कदम रखा था और में हमेशा बड़े गले के बिल्कुल टाईट कपड़े पहनती थी, जिसकी वजह से जो भी मुझे देखता बस देखता ही रह जाता  था और ऐसा ही हाल कुछ मेरे भाई का था। में उसको अपना गोरा सेक्सी बदन दिखाती और वो मेरे पीछे हमेशा लगा रहता और यही हाल मेरे कॉलेज के सभी लड़को का भी था, वो भी मेरे दीवाने थे। दोस्तों मेरे पापा सुबह अपने ऑफिस चले जाते और उसके बाद में दोपहर को जब भी अपने घर पर आती तो हम दोनों भाई बहन ही होते थे। फिर एक दिन हम दोनों घर पर अकेले बैठे हुए फिल्म देख रहे थे, क्योंकि हम दोनों को फिल्म देखने का बहुत शौक था और में अपने कॉलेज से आ चुकी थी। अब हम दोनों का पूरा ध्यान उस फिल्म में था और हमे बड़े मज़े आ रहे थे। उसका मुझे पता नहीं, लेकिन में खुश थी और तभी अचानक से उसमे एक सेक्सी सीन आ गया जिसमें वो दोनों लड़का लड़की एक दूसरे से चिपककर चूमने चाटने लगे। कुछ देर चूमने के बाद उसने लड़की के कपड़े खोल दिए और वो अपने छोटे कपड़ो मतलब ब्रा पेंटी में आ गई। उसको मेरा भाई अपनी खा जाने वाली नजर से घूरकर देखने लगा।

अब वो मुझसे कहने लगा यह फिल्म बहुत अच्छी सेक्सी है, लेकिन इसमे पूरा सब साफ नहीं दिखा रहे है, तो मैंने तुरंत उसकी मन की बात को समझकर कि उसके मन में अब क्या चल रहा है? मैंने उससे पूछा कि तुम्हें इसमे और क्या क्या देखना है, वो इतना सब कुछ तो साफ दिखा रहे है? अब वो मुझसे बोला कि प्रीति वही कपड़ो के अंदर छुपे हुए अंग जिसके लिए में क्या यह पूरी दुनिया पागल है, वो तो नहीं दिखाए ना? तब मैंने उससे पूछा कि कौन से अंग और तुम्हारा कहने का क्या मतलब है, मुझे तुम खुलकर समझाओ? और फिर उसने अपने लंड पर अपना एक हाथ रखकर कहा कि यह वाले अंग। दोस्तों में उसका वो इशारा तुरंत समझकर उसकी तरफ देखकर हंसने लगी, लेकिन तभी उसने अपनी अंडरवियर को उतार दिया और अब वो अपने लंड को मेरे ही सामने धीरे धीरे सहलाने लगा। फिर मैंने उससे पूछा कि तुम यह क्या कर रहे हो? उसने मुझसे कहा कि तुम्हें भी अगर ऐसा करना है तो कर सकती हो, मुझे उसमे किसी भी तरह की कोई भी आपत्ति नहीं होगी और अब मैंने उसकी उस बात को सुनकर अपनी पेंटी को उतार दिया और में भी शुरू हो गयी। दोस्तों उस दिन हमने एक दूसरे के सामने ही मुठ मारी, लेकिन चुदाई जैसा कोई भी काम नहीं किया। अगले दिन से हम लोग एक दूसरे के सामने पूरी तरह से खुल गये थे और धीरे धीरे हम लोग चुदाई भी करने लगे थे। फिर ऐसे ही एक दिन हम लोग अपनी चुदाई के काम में व्यस्त थे। उस समय में उसके सामने अपने दोनों हाथों पैरों पर बैठकर कुतिया बनी हुई थी और वो मेरे पीछे से मेरी गांड में अपनी जोरदार स्पीड से अपना लंड डालकर अंदर बाहर करके मेरी गांड मार रहा था और में ज़ोर ज़ोर से उसको गलियाँ दे रही थी, वो मुझे बहुत जबरदस्त तरीके से रगड़कर वो मेरी गांड को ठोक रहा था और में उस दर्द की वजह से चिल्ला रही थी और उसको कुत्ते कमीने कह रही थी। तभी पीछे से पापा की आवाज़ आ गई वो हमें देखकर पूछने लगे यह सब क्या हो रहा है? उनकी आवाज सुनकर हम दोनों उठकर तुरंत खड़े हो गये क्योंकि दरवाजे पर पापा खड़े हुए थे और अब तक उन्होंने हमें इस हालत में वो काम करते हुए देख लिया था, वो हमारी इस हरकत से बहुत ज्यादा गुस्सा हुए और उन्होंने गुस्से में हम दोनों को घर से बाहर निकल जाने को बोलकर वो अपने रूम में चले गये। अब मोहन ने मुझसे कहा कि अब हमारे पास सिर्फ़ एक ही रास्ता है, जिसकी वजह से हम दोनों बच सकते है, मैंने उससे पूछा कि वो क्या? तब उसने मुझसे कहा कि पापा का वो गुस्सा छोड़ दो और उस बात को भूल जाओ जो उन्होंने हमें अभी कुछ देर पहले गुस्से में कही थी। फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है में तुम्हारे कहने पर वो सब भुला देती हूँ और अब वो मुझसे बोला कि तुम चलो मेरे साथ, तो में उसके साथ हो गई और फिर हम दोनों नंगे ही पापा के रूम में चले गये। मैंने देखा कि उस समय पापा दारू पी रहे थे और हम दोनों को अपने सामने इस तरह से पूरा नंगा खड़ा देखकर वो कहने लगे क्या तुम्हें बिल्कुल भी शर्म नहीं आती? तो मैंने उनसे कहा कि आती तो है पापा, लेकिन इस गरम जोशीली जवानी के आगे किसी का ज़ोर नहीं चलता है और में भी क्या करती, मुझे भी तो जवानी चढ़ी हुई थी। में इसको अपने बस में कब तक रखती? तो पापा बोले कि तुम्हे क्या इतनी जवानी चढ़ी थी कि अब तुम अपने भाई से ही चुदाई करवाने लगी। उसको भी तुमने अपने साथ उस काम में लगा लिया, ऐसा क्या हो गया है तुम्हे, तुम अब बिल्कुल पागल हो चुकी हो। अब में और मेरे पापा एक दूसरे से पूरी तरह से खुलकर बातें कर रहे थे, इसलिए मेरे मन से पूरा डर निकल चुका था। फिर मैंने उनसे कहा कि पापा अगर यह मेरा भाई ना होता तो क्या आप फिर भी मेरी इस चुदाई से इतना ही नाराज़ होते जितना अभी हो?

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दोस्तों मेरी उस बात को सुनकर पापा बिल्कुल चुप हो गए और वो मन ही मन ना जाने क्या सोचने लगे थे? तभी मैंने उनसे कहा कि एक पल के लिए आप यह बात सोचिए कि में आपकी बेटी नहीं हूँ और आपके सामने सिर्फ़ एक नंगी जवान गरम लड़की अपनी कामुक चूत को लेकर खड़ी हुई है, क्या आप उसको नहीं देखेंगे? आप यह देखिए मेरे दूध इतने बड़े सेक्सी है, मेरी चूत इतनी चिकनी है और मेरी गांड इतनी मोटी है कि इन्हें कोई प्यार करने वाला भी तो होना चाहिए ना। फिर पापा ने मेरी यह बात को सुनकर उन्होंने मेरे पूरे शरीर को बहुत ध्यान से देखा और वो लगातार घूर घूरकर देखते ही रहे और तब मैंने उनसे कहा कि देखिए अब आप खुद भी मेरे इस गोरे गरम सेक्सी बदन को देखकर धीरे धीरे गरम हो रहे है, क्यों में ठीक कह रही हूँ ना पापा, आप बहुत लंबे समय से बिल्कुल अकेले है और कितने ही दिनों से आपने भी किसी की चुदाई नहीं की है। आप अपनी इस अनमोल जिंदगी को ऐसे ही खत्म मत कीजिए, यह मेरी प्यासी चूत आपके लिए ही तो है और उनसे यह बात कहकर मैंने तुरंत अपने एक पैर को उठा दिया जिसकी वजह से मेरी चूत उनके सामने फैल गयी। अब पापा अपने हाथ से उस गिलास को नीचे रखकर तुरंत खड़े हो गये थे और उनकी इस हरकत को देखकर में तुरंत समझ गई थी कि वो अब क्या करना चाहते है? इसलिए मैंने उनको अपनी बातों से और भी ज्यादा गरम करना शुरू कर दिया था। फिर मैंने उनसे कहा कि पापा आज आप मुझे अपनी बेटी नहीं बल्कि अपनी बीवी समझो और अगर बीवी का यह रूप आपको पसंद ना आए तो आज आप मुझे अपनी रांड ही बना लो, प्लीज अब आओ ना मेरे पास और इतना कहने पर पापा मेरे पास आ गये। फिर हम दोनों ने एक दूसरे को चूमा और मैंने सही मौका देखकर उनको भी पूरा नंगा कर दिया था। फिर मैंने देखा कि उनका लंड करीब 7 इंच का था और वो पूरा तनकर खड़ा हुआ था, जिसको देखकर में मन ही मन बहुत खुश थी, इसलिए मैंने उनको चूमते हुए कहा कि अभी तो आप मुझ पर बड़ा गुस्सा थे और अब आप मुझे चोदने के लिए तैयार हो, पापा आप पूरे बेटीचोद है। फिर पापा ने मुझसे पूछा कि तुमने यह गंदी गाली देना कहाँ से सीखा? मैंने उनसे कहा कि मोहन ने मुझे बहुत कुछ नया करना सिखाया है और अब पापा पूछने लगे कि वो बहनचोद तुम्हें कब से चोद रहा है और यह सब तुम दोनों के बीच में कब से चल रहा है? तो मैंने उनसे कहा कि बहुत समय हो गया है और हम एक दूसरे की प्यास को बुझा लेते है। हम दोनों ऐसा बहुत बार ना जाने कितने दिनों से करते आ रहे है? तो पापा उस समय मेरी चूत को चाट रहे थे, वो बोले कि मेरी प्यास अब बुझेगी। फिर मैंने उनसे कहा कि हाँ चाटो मुझे, चूसो मेरी इस चूत को और चोदो मुझे। फिर वो जोश में आकर मेरी चूत को चूसते रहे और अपनी जीभ को मेरी चूत में अंदर तक डालकर हिलाते रहे और उसके कुछ देर बाद मैंने पापा से कहा कि पापा में अब आपका लंड अपने मुहं में लेकर उसको चूसना चाहती हूँ। फिर पापा ने मुझसे कहा कि हाँ ले ले बेटी, यह इतना लंबा मोटा तेरे लिए ही है हाँ चूस ले इसको और फिर में उनका लंड अपने मुहं में लेकर लोलीपोप की तरह चूस रही थी, जिसकी वजह से मेरे साथ साथ उनको भी बहुत मज़ा आ रहा था और फिर कुछ देर लंड चूसने के बाद मैंने उनकी गांड में अपनी ऊँगली को डाल दिया और अब मैंने महसूस किया था कि वो अब मेरी चूत को अपने लंड से जोश भरे धक्के देकर उसकी चुदाई करने के लिए एकदम तैयार थे। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मैंने आवाज़ दी कि मोहन अब तू भी अंदर आजा, क्योंकि मोहन अभी तक भी रूम के बाहर ही खड़ा हुआ था और अब वो भी मेरी आवाज को सुनकर तुरंत अंदर आ गया और वो पापा से पूछने लगा क्यों पापा आपको भी दीदी की जवानी ने गरम कर दिया ना? तो पापा उससे बोले कि बहनचोद तू खुद तो इसको अपनी रांड बनाकर हर कभी इसको चोद देता है तो में भी क्यों ना इसकी चुदाई करूं? तो मैंने उनसे कहा कि वो सब तो ठीक है, लेकिन अब मेरी एक शर्त है, वो दोनों मुझसे पूछने लगे कि वो क्या है? तब मैंने उनसे कहा कि मुझे एक ही साथ एक लंड गांड में दो और एक मेरी चूत में डालकर मेरी जमकर चुदाई करो जिससे मुझे भी अपनी चुदाई में पूरा मज़ा आए और तुम दोनों भी खुश हो जाओ। दोस्तों सच कहूँ तो मेरी वो बात सुनकर वो दोनों बड़े खुश हो गये और उनके चेहरे ख़ुशी से खिल उठे और में उनके मन की बात को समझ गई। फिर मोहन मेरे पास आया और वो मुझसे बोला कि ठीक है चल अब जल्दी से तू अपनी चूत को फैला ले और मैंने उसके कहने पर अपनी चूत की पंखुड़ियों को मेरे एक हाथ की उँगलियों की मदद से फैला लिया और उसने मेरी चूत पर थूक दिया और फिर उसके बाद उसने मेरी चूत को कुछ देर चाटा और उसके बाद वो बोला कि हाँ अब ठीक है यह पूरी गीली हो गई है और उसके बाद उसने मुझसे कहा कि दीदी अब गांड को फैला ले और मैंने ठीक वैसा ही किया, लेकिन इस बार मेरी गांड को मेरे पापा ने चाटा और फिर वो भी कुछ देर चाटने के बाद मुझसे बोले कि हाँ अब यह भी गीली हो गई है।

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फिर मैंने उन दोनों से पूछा कि कौन मेरी चूत में अपना लंड डालेगा और कौन मेरी गांड मारेगा? तब पापा कहने लगे कि मोहन तू इसकी चूत ले ले और में इसकी गांड को अपने लंड का मज़ा देता हूँ। आज यह भी क्या याद रखेगी। अब मोहन ने कहा कि नहीं पापा आज आप इसकी चूत ले लो में इसकी गांड में अपना लंड डालूँगा प्लीज, पापा बोले कि हाँ ठीक है और फिर में पापा के ऊपर लेट गई। पापा ने अपने एक हाथ से पकड़कर लंड को मेरी चूत में डाल दिया और उनका लंड 7 इंच का था और बहुत मोटा भी था इसलिए में उसके अंदर जाते ही दर्द की वजह से चिल्ला गई उफ्फ्फफ्फ्फ़ माँ मार दिया रे आईईईईई यह कौन सा हथियार है रे? उफ्फ्फफ्फ्फ़ में मर जाऊँगी मादरचोद कुत्ते की औलाद तेरी माँ ने क्या गधे से उसका लंड अपनी चूत में लिया था क्या? साले छिनाल की औलाद तभी तो तेरा इतना बड़ा, मोटा लंड है जिससे मेरी चूत फट गयी। फिर पापा बोले कि रंडी कुतिया तेरी माँ की भी मैंने चूत ऐसे ही अपना लंड डालकर उसको फाड़ दिया था, अब देख आज में तेरी चूत को भी ठीक वैसे ही फाड़ दूँगा। गधे का लंड तो तेरी माँ ने लिया था और वो गधा में हूँ और आज में तुझे भी वैसे ही चोदूंगा, तेरी माँ की चूत साली रंडी ले और ले मज़े मेरे लंड के तुझे चुदाई का और लंड लेने का बहुत शौक है ना, कर मज़े मेरे साथ। अब वो अपनी तरफ से जोश में आकर ज़ोर ज़ोर से मेरी चूत को धक्के दिए जा रहे थे जिसकी वजह से उनका लंड अब मेरी चूत में पूरा अंदर चला गया था और अब पापा बोले कि मोहन तू क्या वहाँ पर खड़ा होकर अपनी इस रंडी बहन की चुदाई को देख रहा है? चल अब इधर आजा बहनचोद मार तू इसकी गांड और दे इसको वो भी मज़ा जिसके लिए इसने हमसे कहा था। दोस्तों मेरा एक बूब्स पापा के मुँह में था और दूसरा उनके हाथ में, वो धक्के देने के साथ साथ उनको भी मसल निचोड़ रहे थे और तभी मोहन ने भी सही मौका देखकर मेरी गांड में अपना लंड डाल दिया और फिर पापा उससे पूछने लगे क्यों बे तेरी इस रंडी बहन की गांड ज्यादा टाइट है क्या? तो मोहन बोला कि हाँ पापा यह छिनाल ऐसे ही हर रोज मुझसे अपनी गांड मरवाती है, लेकिन फिर भी इसकी गांड अभी भी इतनी टाइट है? अब हम तीनों एकदम फिट हो गये थे और मैंने उन दोनों से बोला कि अब अगर किसी भी कुत्ते हरामी की औलाद ने अपने मुहं से कोई भी आवाज़ की तो में उसका लंड काट दूँगी। अब तुम दोनों बिल्कुल चुप रहो और चोदो मुझे ज़ोर से और पूरे जोश के साथ मुझे वो मज़े दो।

फिर उन दोनों ने अपना अपना लंड सही जगह पर फिट किया और अब वो दोनों बारी बारी से मुझे धक्के लगाने लगे, जिसकी वजह से मुझे अब जन्नत का मजा मिल रहा था, लेकिन कुछ देर बाद हम लोग एकदम से जोश में आ गये और में उन दोनों को गालियाँ दे रही थी और वो दोनों मुझे अपने बीच में फँसाकर धक्के देकर मेरी चुदाई किए जा रहे थे और अब पापा का लंड चूत से अंदर बाहर निकलते समय फक फक की आवाज़ कर रहा था। फिर मैंने उनसे पूछा कि पापा सच सच बताना मेरी माँ की चूत मस्त थी या मेरी मस्त है? तब पापा बोले कि तेरी माँ तो पक्की रांड थी, वो भी दिनभर में ना जाने कितनों से अपनी चुदाई करवाती थी, वो पूरी चुदेल थी, लेकिन तू तो मेरी रानी है, मेरी रंडी है, मेरी छिनाल है और में तुझे तो हर रोज सुबह शाम ऐसे ही चोदता रहूँगा। फिर मोहन बोला कि मादरचोद में भी तो इसकी चुदाई करूंगा, तो में उससे बोली कि हाँ तुम दोनों ही मुझे चोद लेना, लेकिन अभी तुम दोनों इस स्पीड को और भी तेज करो, चलो जल्दी जल्दी आह्ह्ह्हहह म्‍म्म्मम उफफ्फ्फ्फ़ चोदो मुझे ज़ोर लगाकर, डाल दो पूरा, अंदर तक जाने दो। तभी कुछ देर धक्के देने के बाद पापा बोले कि में अब झड़ने वाला हूँ, मैंने कहा कि हाँ ठीक है अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लो और मेरे मुँह में डाल दो।

दोस्तों मोहन अभी भी मेरी गांड में धक्के दे रहा था और अब पापा ने अपना लंड बाहर निकाल लिया और वो मेरे मुँह में लंड को डालने की जगह वो मोहन की गांड के पास आ गये और वो मुझसे बोले कि बेटी इसे तू ज़ोर से पकड़ ले नहीं तो यह भाग जाएगा। अब मोहन पापा की उस हरकत उनकी नियत को समझकर बोला कि नहीं पापा आप मेरी गांड मत मारना, मुझे बहुत दर्द होगा और मैंने कहा कि हाँ पापा मारो मारो इसकी गांड इस मादरचोद ने मुझे बहुत बार चोदा है, इसने कभी भी मुझ पर तरस नहीं खाया, आज आप भी जमकर चोदो इसको। दोस्तों मोहन का लंड अब भी मेरी गांड में था और मैंने उसे ज़ोर से पकड़ लिया और उसके बाद पापा ने पीछे से उसकी गांड में थूक दिया और थोड़ा सा तेल भी लगा दिया। फिर उन्होंने सही निशाना लगाकर एक जोरदार धक्का देकर अपना पूरा लंड उसकी गांड में फँसा दिया और अब मोहन उस दर्द की वजह से रोने लगा, तो मैंने कहा कि मोहन रो मत मुझे भी दर्द होता है तू मुझे चोद लेना। फिर मोहन ने कहा कि साली कुतिया तेरी वजह से आज मेरी गांड मर गयी। आज अब तू देख में क्या करता हूँ और गुस्से में मोहन ने मेरी गांड पर ज़ोर ज़ोर से अपना लंड डाला और उधर पापा ने पीछे से मोहन की गांड मार ली वो मुझसे पूछने लगे कि क्यों बेटी इस खेल में तुम्हे मज़ा आ रहा है ना? मैंने कहा कि हाँ पापा, लेकिन आज रात को मोहन आपकी गांड मारेगा। फिर पापा ने कहा कि ठीक है मुझे कोई भी आपत्ति नहीं है, अभी तो में इसकी गांड मार रहा हूँ और जल्दी ही पापा ने मोहन की गांड में अपना पूरा वीर्य निकाल दिया और वो झड़ गये और उसके बाद मोहन मेरी गांड में झड़ गया। फिर उसने भी अपना गरम गरम माल मेरी गांड में डाल दिया और इसके बाद हम लोग अपने घर में सेक्स को लेकर बहुत खुले हो गये। मोहन और पापा एक दूसरे की गांड मार लेते और फिर मेरे पास आकर हम तीनों मिलकर मज़े करते। मैंने एक रबर का लंड खरीद लिया था, जिसको अपनी कमर पर पहनकर में उन दोनों की गांड मारती थी और हम बहुत मज़े करते थे। दोस्तों हम सभी लोग इस दुनिया के सबसे बड़े चुदक्कड़ लोग है, जिन्होंने अपने मज़े मस्ती के लिए वो सब किया जो कोई और नहीं कर सकता ।।

धन्यवाद …

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